एआई के बढ़ते इस्तेमाल से साइबर खतरे गंभीर, टाटा एआईजी ने कारोबारियों को किया सतर्क

लखनऊ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी गंभीर होती जा रही हैं। साइबर हमला किसी कंपनी की फैक्ट्री का संचालन रोक सकता है, सप्लाई चेन बाधित कर सकता है और ग्राहकों की गोपनीय जानकारी लीक होने से बड़ा वित्तीय नुकसान पहुंचा सकता है। इन जोखिमों को देखते हुए टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस ने साइबर जागरूकता माह के अवसर पर लखनऊ के कारोबारियों और कंपनियों से अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा साइबर इंश्योरेंस कवर की समीक्षा करने की अपील की है।
कंपनी के मुताबिक, साइबर हमलों, एआई से जुड़े नए जोखिमों और लगातार बदलते नियामकीय नियमों के कारण कारोबारियों को साइबर सुरक्षा को व्यवसाय के प्रमुख जोखिमों में शामिल करना चाहिए। इसे केवल तकनीकी समस्या मानने के बजाय वित्तीय नुकसान, कानूनी दायित्व और व्यावसायिक संचालन पर पड़ने वाले प्रभावों के साथ देखना जरूरी है।
एआई के इस्तेमाल से बढ़ रहीं नई चुनौतियां
एआई आधारित तकनीकों ने कारोबार में कामकाज को आसान बनाया है, लेकिन इनके गलत इस्तेमाल से डेटा लीक, साइबर धोखाधड़ी और अन्य सुरक्षा संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई कर्मचारी अनजाने में ग्राहक के गोपनीय दस्तावेज किसी सार्वजनिक एआई टूल पर अपलोड कर देता है, तो कंपनी की संवेदनशील जानकारी उजागर हो सकती है। इसी तरह, किसी सिस्टम पर साइबर हमला होने से उत्पादन और माल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
टाटा एआईजी का कहना है कि कंपनियों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि एआई के कारण होने वाले सभी नुकसान उनकी मौजूदा बीमा पॉलिसियों में स्वतः कवर हो जाएंगे। कारोबारियों को अपनी जरूरतों और जोखिमों का आकलन कर बीमा कंपनी या ब्रोकर से पॉलिसी की शर्तों, कवरेज और अपवादों के बारे में स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए।
एआई जोखिम भी बन सकते हैं बीमा क्षेत्र की बड़ी चुनौती
टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस के नेशनल हेड (लायबिलिटी लाइन्स) नज्म बिलग्रामी ने कहा कि एआई से जुड़े जोखिम उसी तरह विकसित हो रहे हैं, जैसे करीब एक दशक पहले साइबर जोखिमों ने बीमा क्षेत्र में जगह बनानी शुरू की थी। उनके अनुसार, शुरुआत में साइबर इंश्योरेंस सामान्य तकनीकी बीमा का छोटा हिस्सा था, लेकिन समय के साथ यह एक अलग और महत्वपूर्ण श्रेणी बन गया। एआई जोखिमों के मामले में भी इसी तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
उन्होंने कंपनियों को सलाह दी कि वे अपने कारोबार में एआई के इस्तेमाल से उत्पन्न संभावित खतरों को समझें और अपने बीमा साझेदारों से चर्चा करें कि मौजूदा पॉलिसी में उन जोखिमों के लिए कितनी सुरक्षा उपलब्ध है।
प्रोफेशनल और निदेशक दायित्व से जुड़े जोखिम भी बढ़े
एआई के बढ़ते उपयोग के साथ बीमा क्षेत्र में प्रोफेशनल इंडेम्निटी और डायरेक्टर्स एंड ऑफिसर्स (डीएंडओ) लायबिलिटी से जुड़े जोखिमों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इनमें एआई के बारे में भ्रामक दावे, एआई परियोजनाओं में निवेश से नुकसान और एआई प्रणालियों के कारण भेदभाव जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं।
कंपनी के अनुसार, भविष्य में एआई से संबंधित विवादों के चलते कानूनी खर्च, तीसरे पक्ष के दावे, नियामकीय जांच और सिस्टम में खराबी के कारण कारोबार ठप होने से होने वाले नुकसान जैसे मामलों के लिए विशेष बीमा उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। हालांकि, ऐसे जोखिमों का वास्तविक कवरेज संबंधित पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करेगा।
डीएंडओ दावों में नियामकीय कार्रवाई की बढ़ती भूमिका
नज्म बिलग्रामी के मुताबिक, नियामकीय कार्रवाई अब डीएंडओ क्लेम्स का एक महत्वपूर्ण कारण बन गई है। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, उसके डीएंडओ पोर्टफोलियो में दर्ज होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक मामले सीधे नियामकीय कार्रवाइयों से जुड़े हैं। पांच से सात वर्ष पहले यह आंकड़ा लगभग 13 प्रतिशत था।
यह बदलाव कंपनियों के लिए नियामकीय अनुपालन, पारदर्शिता और प्रबंधन की जवाबदेही के महत्व को दर्शाता है। भारत में डेटा गोपनीयता से जुड़े नियमों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त होते प्राइवेसी मानकों के बीच कंपनियों को अपनी सुरक्षा और अनुपालन प्रक्रियाओं की नियमित समीक्षा करने की जरूरत है।
लायबिलिटी इंश्योरेंस का बदल रहा परिदृश्य
टाटा एआईजी के अनुसार, भारत में लायबिलिटी इंश्योरेंस का स्वरूप कई वजहों से बदल रहा है। इनमें डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएं, एआई के इस्तेमाल और उसके संचालन से जुड़े जोखिम, व्यावसायिक अनुबंधों की बढ़ती जटिलता, ईएसजी खुलासों और ग्रीनवॉशिंग पर निगरानी, तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं पर निर्भरता, शेयरधारकों की बढ़ती सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय मुकदमों से जुड़े दायित्व शामिल हैं।
कंपनी ने कारोबारियों को सलाह दी है कि वे अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बीमा सुरक्षा की भी समय-समय पर समीक्षा करें। कर्मचारियों को डेटा सुरक्षा के प्रति जागरूक करना, एआई टूल्स के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नीतियां बनाना और संभावित साइबर घटनाओं से निपटने की तैयारी रखना भी जोखिम कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
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