ट्रांसफार्मर क्षति पर अभियंताओं से वसूली का फरमान अन्यायपूर्ण, वापस ले प्रबंधन: संघर्ष समिति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा क्षतिग्रस्त वितरण ट्रांसफार्मरों की मरम्मत का खर्च अभियंताओं और अधिकारियों से वसूलने के आदेश पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। संघर्ष समिति ने इस फरमान को अन्यायपूर्ण, अव्यावहारिक और बिजली व्यवस्था के हितों के प्रतिकूल बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण विद्युतीकरण एवं द्वितीय प्रणाली नियोजन संगठन द्वारा 10 अगस्त को जारी पत्र में अधिकारियों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई और मरम्मत खर्च की वसूली की रिपोर्ट मांगी गई है। समिति का आरोप है कि प्रबंधन बिना किसी निष्पक्ष तकनीकी जांच के सीधे तौर पर फील्ड अधिकारियों को आर्थिक रूप से दंडित करने का प्रयास कर रहा है।
पदाधिकारियों का कहना है कि ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने के पीछे ओवरलोडिंग, असंतुलित भार, कम क्षमता वाले पुराने ट्रांसफार्मर और बढ़ती बिजली मांग जैसे कई तकनीकी कारण होते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में निजी नलकूपों के बढ़ते लोड के सापेक्ष बिजनेस प्लान में क्षमता वृद्धि के पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए हैं। ऐसे में शीर्ष स्तर की नीतिगत खामियों का दायित्व फील्ड अभियंताओं पर डालना तकनीकी व नैतिक रूप से गलत है।
समिति ने स्पष्ट किया कि सेवा नियमों के तहत व्यक्तिगत लापरवाही सिद्ध होने पर कार्रवाई का प्रावधान पहले से मौजूद है, लेकिन बिना निष्पक्ष जांच के सीधा आर्थिक दंड स्वीकार्य नहीं होगा। इसके अलावा, फील्ड में कर्मचारियों की भारी कमी के बावजूद कर्मी 24 घंटे आपूर्ति बहाल रखने में जुटे हैं। ऐसे में रिकवरी के डर से कर्मचारियों का मनोबल गिरेगा।
संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें:
ट्रांसफार्मर क्षति के नाम पर अभियंताओं व कर्मचारियों से वसूली की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए।
वसूली से पूर्व स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि की जाए।
बढ़ती मांग के अनुसार पर्याप्त मानव व तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग से उत्पन्न अव्यवस्थाओं की समीक्षा की जाए।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि यह दंडात्मक आदेश वापस नहीं लिया गया और कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो प्रदेश भर के बिजली कर्मी उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
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