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राजस्थान निकाय चुनाव में BJP का दबदबा, कांग्रेस को बड़ा झटका, चार नगर निगमों में स्पष्ट बहुमत, कई जगह निर्दलीय किंगमेकर

By News Desk·14 Sept 2026 09:28 PM (IST)
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राजस्थान निकाय चुनाव में BJP का दबदबा, कांग्रेस को बड़ा झटका, चार नगर निगमों में स्पष्ट बहुमत, कई जगह निर्दलीय किंगमेकर

कुंवर अशोक सिंह राजपूत

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव परिणामों ने राज्य की सियासत में भाजपा को बढ़त और कांग्रेस के सामने नई चुनौती की तस्वीर पेश की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा ने शहरी निकायों में कांग्रेस पर बढ़त बनाई है। हालांकि 10 नगर निगमों के नतीजे पूरी तरह एकतरफा नहीं रहे और कई बड़े शहरों में कांग्रेस तथा निर्दलीयों ने भाजपा की राह मुश्किल कर दी है।

सोमवार को जारी नतीजों में भाजपा ने जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा नगर निगमों में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं बीकानेर में कांग्रेस ने बढ़त बनाकर निगम पर अपना कब्जा मजबूत किया है।अजमेर और पाली में भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, जबकि जोधपुर और भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है।

जोधपुर में BJP-कांग्रेस बराबरी पर

जोधपुर नगर निगम का मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। यहां भाजपा और कांग्रेस ने 44-44 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि निर्दलीय पार्षदों ने भी महत्वपूर्ण संख्या में जीत हासिल की। ऐसे में निगम बोर्ड बनाने के लिए दोनों प्रमुख दलों की नजर निर्दलीय पार्षदों पर टिक गई है। निर्दलीयों का समर्थन जिस खेमे को मिलेगा, मेयर पद और बोर्ड के गठन में उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है।

बीकानेर में कांग्रेस की वापसी

बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने भाजपा को बड़ा झटका दिया है। यहां कांग्रेस ने स्पष्ट बढ़त बनाते हुए सत्ता की तस्वीर अपने पक्ष में कर ली। भाजपा के लिए यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य के अन्य प्रमुख शहरी क्षेत्रों में पार्टी ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है।

अजमेर और पाली में कांग्रेस आगे

अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37, भाजपा ने 32 और निर्दलीयों ने 11 सीटें जीतीं। इसी तरह 65 सदस्यीय पाली नगर निगम में कांग्रेस को 29, भाजपा को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। दोनों शहरों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालांकि बोर्ड गठन में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है।

भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में परिणामों ने अलग तस्वीर पेश की। 65 सदस्यीय निगम में निर्दलीयों ने 36 सीटों पर जीत या बढ़त हासिल की, जबकि भाजपा 20 और कांग्रेस सात सीटों पर रही। ऐसे में भरतपुर में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।

भाजपा के लिए शहरी क्षेत्रों में मजबूत संदेश

जयपुर में भाजपा ने 150 में से 77 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 52 वार्डों में विजयी रही। कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में भी भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। उदयपुर में भाजपा ने 53, भीलवाड़ा में 45 और कोटा में 53 वार्ड जीते। इससे राज्य के प्रमुख शहरी केंद्रों में भाजपा की संगठनात्मक पकड़ मजबूत होने का संकेत मिला है।

राज्य के कुल शहरी निकाय चुनाव परिणामों में भी भाजपा कांग्रेस से आगे रही है। सोमवार शाम तक घोषित करीब 10,200 वार्डों के परिणामों में भाजपा ने 4,171 वार्ड, जबकि कांग्रेस ने 3,597 वार्ड जीते थे। इससे स्पष्ट है कि कुल वार्ड स्तर पर भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई है, हालांकि निर्दलीयों ने भी बड़ी संख्या में जीत दर्ज कर कई निकायों में समीकरण बदल दिए हैं।

1.44 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने डाला वोट

राजस्थान में इस बार 309 शहरी निकायों के चुनाव दो चरणों में कराए गए। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं शामिल थीं। मतदान 9 और 11 सितंबर को हुआ, जबकि मतगणना 14 सितंबर को हुई। कुल मतदान करीब 73.5 प्रतिशत रहा, जो पिछले निकाय चुनाव के मुकाबले अधिक है।

इन चुनावों को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल के शहरी प्रदर्शन की अहम राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था। भाजपा ने जहां परिणामों को सरकार के कामकाज और संगठन की जीत बताया है, वहीं कांग्रेस के लिए नतीजे 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की चुनौती बढ़ाते हैं।

राजस्थान के इन निकाय चुनावों का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह है कि भाजपा ने शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत रखी है, लेकिन अजमेर, पाली, बीकानेर, जोधपुर और भरतपुर जैसे महत्वपूर्ण शहरों के परिणाम बताते हैं कि कांग्रेस और निर्दलीय अभी भी चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं।खासकर निर्दलीय पार्षद कई नगर निगमों में बोर्ड गठन के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

राजनीतिक रूप से क्यों अहम हैं ये नतीजे?

इन परिणामों को केवल नगर निकायों का चुनाव मानकर नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले यह भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए शहरी मतदाताओं के रुझान का महत्वपूर्ण संकेत है। भाजपा के लिए यह परिणाम संगठनात्मक मजबूती का संदेश है, जबकि कांग्रेस के लिए बीकानेर, अजमेर और पाली जैसे परिणाम राहत देने वाले जरूर हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर पार्टी को भाजपा की बढ़त को चुनौती देने के लिए अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करना होगा।

फोटो सोर्स - सोशल मीडिया

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