MP राज्यसभा चुनाव में नामांकन पर कानूनी घमासान, लोहानी की उम्मीदवारी पर संकट; हरदीप पुरी के हलफनामे पर भी उठे सवाल

कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार लोहानी के फॉर्म-26 को लेकर विवाद, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर भी आपत्तियों की चर्चा; 12 नवंबर को होना है मतदान
भोपाल। मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के उपचुनाव में नामांकन पत्रों की जांच ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस ने भोपाल के समाजसेवी राजकुमार लोहानी को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में समर्थन दिया है। अब दोनों नामांकनों को लेकर उठे सवालों ने चुनावी प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है।
राजकुमार लोहानी के नामांकन के साथ अनिवार्य चुनावी शपथपत्र फॉर्म-26 जमा नहीं होने का मामला सामने आया है। वहीं, हरदीप सिंह पुरी के हलफनामे पर भी तीन आपत्तियां उठाए जाने की खबरें हैं। हालांकि, इन तीनों आपत्तियों के विस्तृत बिंदुओं और उन पर निर्वाचन अधिकारी के अंतिम निर्णय की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
फॉर्म-26 नहीं होने से लोहानी की उम्मीदवारी पर सवाल
भोपाल के रहने वाले राजकुमार लोहानी ने 2 नवंबर को नामांकन के अंतिम दिन निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा दाखिल किया था। कांग्रेस के उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे उनके प्रस्तावक बने थे। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने 10 विधायकों के समर्थन का दावा किया था।
नामांकन के बाद निर्वाचन संबंधी जानकारी में उनके साथ अनिवार्य फॉर्म-26 शपथपत्र जमा नहीं होने की बात सामने आई। इस फॉर्म में उम्मीदवार को अपनी शैक्षणिक योग्यता, संपत्ति और आपराधिक मामलों से संबंधित जानकारी देनी होती है।

हरदीप सिंह पुरी के हलफनामे पर भी आपत्तियों की चर्चा
कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के साथ जमा शपथपत्र पर तीन बिंदुओं को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। कटारे ने इन मामलों में निर्वाचन अधिकारी के सामने अपना पक्ष रखा है।
1. पत्नी के नाम और संपत्ति का विवरण नहीं देने का आरोप
कटारे की पहली आपत्ति पुरी के हलफनामे में पत्नी से संबंधित जानकारी को लेकर है। उनका आरोप है कि शपथपत्र में पत्नी का नाम और उनकी संपत्ति का पूरा विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया है। कटारे ने इस जानकारी को लेकर सवाल उठाते हुए निर्वाचन अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है।
यह फिलहाल कांग्रेस विधायक की ओर से लगाया गया आरोप है। इस पर हरदीप सिंह पुरी का पक्ष और निर्वाचन अधिकारी का निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
2. स्विस फ्रैंक और डॉलर में संपत्ति बताने पर सवाल
दूसरी आपत्ति विदेशी संपत्ति के विवरण को लेकर है। कटारे का कहना है कि चुनावी हलफनामे में संपत्ति का मूल्य भारतीय रुपये में स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुरी के शपथपत्र में कुछ संपत्तियों का उल्लेख स्विस फ्रैंक और अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में किया गया है।
कटारे ने विशेष रूप से जिनेवा स्थित अपार्टमेंट और विदेशी बैंक खातों से संबंधित विवरणों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विदेशी मुद्रा में संपत्ति का मूल्य दर्ज करने के साथ उसका भारतीय रुपये में समतुल्य मूल्य और लागू विनिमय दर भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि संपत्ति की वास्तविक कीमत का आकलन किया जा सके।
3. नोटरी के सामने शपथपत्र सत्यापित कराने की प्रक्रिया पर आपत्ति
कटारे की तीसरी आपत्ति हलफनामे के सत्यापन से जुड़ी है। उन्होंने नोटरी प्रक्रिया की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शपथपत्र निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अधिकृत नोटरी के सामने सत्यापित नहीं कराया गया।
उनका दावा है कि उम्मीदवार को शपथपत्र पर हस्ताक्षर और सत्यापन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कराना जरूरी है। इसी आधार पर उन्होंने पुरी के दस्तावेजों की वैधता की जांच करने की मांग की है।
हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर दर्ज इन तीनों आपत्तियों को लेकर निर्वाचन अधिकारी ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए शाम पांच बजे तक का समय दिया। अब इस मामले में पुरी की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और निर्वाचन अधिकारी के निर्णय पर नजर रहेगी।

12 नवंबर को प्रस्तावित है मतदान
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 5 नवंबर तक नाम वापस लिए जा सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर 12 नवंबर को मतदान कराया जाएगा।
विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि राज्य की कुल विधानसभा सीटें 230 हैं। ऐसे में संख्या बल के लिहाज से भाजपा की स्थिति मजबूत है। हालांकि, नामांकन पर उठी आपत्तियों ने उपचुनाव की प्रक्रिया को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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