भारत ने पर्यावरण के क्षेत्र में समय से पहले पूरे किए पेरिस समझौते के लक्ष्य : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री बोले- 12 साल में सोलर क्षमता 2 गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हुई, 50 लाख से ज्यादा घरों में रूफटॉप सोलर
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए अपनी पारंपरिक सोच को आधुनिक तकनीक और नीतियों के साथ जोड़कर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने पेरिस में COP-21 के दौरान किए गए अपने सभी जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को तय समय से पहले पूरा किया है।
प्रधानमंत्री शनिवार को ‘पर्यावरण और जलवायु गतिकी का भविष्य’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन पर भारत का आंकड़ा बताया
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है। उन्होंने दावा किया कि विकसित देशों में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत की तुलना में करीब छह गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों के हितों और ऐतिहासिक जिम्मेदारियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहा है।
मोदी ने कहा कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस, CDRI, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस और मिशन LiFE जैसे मंचों के जरिए भारत जलवायु और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े वैश्विक प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है।
2 से 160 गीगावाट से अधिक हुई सौर क्षमता
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है। उनके मुताबिक करीब 12 साल पहले देश की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 2 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हो गई है।
उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अब तक 50 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। वहीं, पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाने का काम भी किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक सौर ऊर्जा के विस्तार के चलते भारत में करीब 20 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन को रोकने में मदद मिली है।
नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता में भी बढ़ोतरी
मोदी ने कहा कि सौर ऊर्जा के अलावा पवन और जल ऊर्जा के क्षेत्र में भी देश की क्षमता बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में भारत की पवन ऊर्जा क्षमता करीब तीन गुना हुई है और नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता लगभग चार गुना बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा के लिए परमाणु ऊर्जा, कोयला गैसीफिकेशन, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में भी काम कर रहा है।
EV की बिक्री में बड़ा इजाफा
प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार वर्ष 2014 से पहले भारत में एक साल में 3,000 से कम इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री होती थी, जबकि पिछले वर्ष करीब 25 लाख ईवी की बिक्री हुई।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में करीब 950 गुना वृद्धि हुई है।

मेट्रो और रेलवे विद्युतीकरण का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश के पांच शहरों में 250 किलोमीटर से कम मेट्रो नेटवर्क था, जबकि अब 20 से अधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं संचालित हो रही हैं और देश का मेट्रो नेटवर्क 1,000 किलोमीटर से अधिक हो चुका है।
उन्होंने रेलवे के लगभग पूर्ण विद्युतीकरण का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे डीजल की खपत कम करने में मदद मिली है। प्रधानमंत्री ने करीब 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और करीब 5,000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय जलमार्गों पर परिवहन का भी जिक्र किया।
जल संरक्षण और खेती में पर्यावरणीय पहल
मोदी ने कहा कि देश में 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए हैं, जबकि ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत करीब डेढ़ करोड़ वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से दो करोड़ से अधिक किसानों को आधुनिक सिंचाई सुविधाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ और मिलेट्स यानी श्री अन्न को भी जल संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि कम पानी में होने वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल फसलों और एग्रो-फॉरेस्ट्री का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में प्राकृतिक खेती के करीब 24 हजार क्लस्टर बनाए गए हैं और जलवायु अनुकूल फसलों की करीब 3,000 किस्में विकसित की गई हैं।
प्लास्टिक कचरे से निपटने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के साथ-साथ Reduce, Reuse और Recycle के सिद्धांत पर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दिया है। उन्होंने गोबरधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में भी काम हो रहा है।
मोदी ने कहा कि भारत के पर्यावरण संरक्षण के प्रयास केवल देश के विकास से जुड़े आंकड़े नहीं हैं, बल्कि मानवता के भविष्य के लिए भारत के योगदान को भी दर्शाते हैं। उन्होंने भारतीय परंपरा के ‘माता भूमिः पुत्रो अहम् पृथिव्याः’ विचार का उल्लेख करते हुए सतत और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण पर जोर दिया।
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