अधिग्रहित जमीन के बदले नौकरी-मुआवजे की मांग, चिनहट में किसानों ने उठाई समस्याओं की आवाज

लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन (राष्ट्रीयतावादी) की जिला इकाई की बैठक गुरुवार को चिनहट तिराहा स्थित कार्यालय में हुई। बैठक में क्षेत्र के किसानों की लंबे समय से चली आ रही विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। संगठन ने अधिग्रहित भूमि के बदले लंबित भुगतान, रोजगार, विकास कार्यों और ग्रामीण सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए संबंधित विभागों और औद्योगिक कंपनी से समाधान की मांग की।
बैठक के बाद संगठन की ओर से एलडीए जोनल इंचार्ज प्रभाकर सिंह को मांगपत्र सौंपा गया। किसान नेताओं अशोक यादव और राम रतन यादव ने बताया कि वर्ष 1984 और 1985 में ग्राम सभा धांवा और गोयला के किसानों की भूमि यूपीएसआईडीसी के माध्यम से अधिग्रहित की गई थी। इसके बाद भूमि औद्योगिक कंपनी को 90 वर्ष की लीज पर दिए जाने की बात कही गई। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के समय स्थानीय परिवारों के हित में कई आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उनमें से कई मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं।
जमीन का पूरा भुगतान और रोजगार की मांग
किसान संगठन ने अधिग्रहित भूमि का पूर्ण भुगतान कराने की मांग उठाई। इसके साथ ही प्रभावित किसान परिवारों के सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण के समय प्रत्येक किसान परिवार के एक-दो सदस्यों को स्थायी रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था।
किसानों ने मांग की कि जिन परिवारों के सदस्य अभी तक रोजगार से वंचित हैं, उनके मामलों की जांच कर नियमानुसार रोजगार अथवा मुआवजे की व्यवस्था की जाए। साथ ही आईटीआई और बीटेक सहित तकनीकी शिक्षा प्राप्त स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की गई।
संगठन ने रोजगार के लिए व्यावसायिक भूखंड पांच प्रतिशत की दर पर उपलब्ध कराने की मांग भी रखी, ताकि प्रभावित किसान परिवार अपने स्तर पर रोजगार और व्यवसाय शुरू कर सकें।
गांवों में विकास और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
किसानों ने केवल रोजगार और मुआवजे तक ही मांग सीमित नहीं रखी, बल्कि प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की भी मांग की। मांगपत्र में किसान बारात घर और पंचायत भवन के निर्माण, गांवों में विकास कार्य कराने तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग शामिल है।

इसके अलावा खंदक गांव स्थित श्मशान घाट की बाउंड्रीवाल का निर्माण, वहां विकास कार्य कराने और आवागमन के लिए उचित रास्ते की व्यवस्था कराने की मांग की गई। धांवा गांव में राजस्व अभिलेखों में दर्ज चकमार्ग को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग भी किसानों ने उठाई।
श्रमिक सहकारी समिति के मामलों की जांच की मांग
किसान संगठन ने अनमोल श्रम संविदा सहकारी समिति लिमिटेड, जैनाबाद से जुड़े श्रमिकों के मुद्दे को भी उठाया। संगठन ने आरोप लगाया कि समिति में कार्यरत श्रमिकों को ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया गया है। इस मामले की जांच कराकर श्रमिकों को उनके अधिकार दिलाने की मांग की गई।
इसके साथ ही वर्ष 2023 में हुए समिति के चुनाव की वैधता की जांच तथा वर्ष 1998 से अब तक समिति के खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच कराने की मांग भी की गई।
जल निकासी और नौकरी पाने वाले परिवारों की सूची मांगी
बैठक में गांवों में जल निकासी की समस्या का मुद्दा भी सामने आया। किसानों ने संबंधित विभाग से जलभराव और जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की। संगठन ने दोनों ग्राम सभाओं से कितने किसान परिवारों के सदस्यों को औद्योगिक कंपनी में रोजगार मिला है, इसकी सूची सार्वजनिक करने की मांग भी की।
किसान नेताओं का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समयबद्ध तरीके से निस्तारण होना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों से मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की।

नगर निगम सीमा में शामिल हुआ गांव, फिर भी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार
बैठक में शहीद भगत सिंह वार्ड द्वितीय के अंतर्गत आने वाले खंदक गांव की मूलभूत समस्याओं का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। गांव की महिलाओं ने बताया कि वर्ष 2019 में नगर निगम की सीमा में शामिल होने के बावजूद अब तक उन्हें बुनियादी सुविधाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीण महिलाओं के मुताबिक गांव में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के दौरान लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रहती है। कई स्थानों पर पानी जमा रहने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है। उनका कहना है कि लगातार जलभराव का असर अब मकानों पर भी पड़ने लगा है।
महिलाओं ने बताया कि पानी के लगातार जमा रहने से कई घरों की नींव तक प्रभावित हो रही है और मकानों की दीवारों में दरारें आने लगी हैं। इससे ग्रामीण परिवारों में अपने मकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने मांग की कि खंदक गांव में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कराई जाए, जलभराव वाले स्थानों को चिह्नित कर तत्काल समाधान कराया जाए और क्षतिग्रस्त मकानों की स्थिति का संबंधित विभाग से निरीक्षण कराया जाए। ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि नगर निगम सीमा में शामिल होने के बाद उन्हें बेहतर सड़क, नाली, जल निकासी और अन्य मूलभूत सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करें, ताकि बरसात के दौरान होने वाले जलभराव से लोगों के घरों और जनजीवन को नुकसान न पहुंचे।
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