फ़िल्म अभिनेता मुश्ताक खान का निधन, कैंसर से जूझते हुए ली आखिरी सांस

मुंबई। पर्दे पर अपनी मौजूदगी से सीन में जान डाल देने वाले अभिनेता मुश्ताक खान अब नहीं रहे। ‘वेलकम’, ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘आशिकी’ और ‘हम हैं राही प्यार के’ जैसी फिल्मों में अपने यादगार किरदारों से पहचान बनाने वाले मुश्ताक खान का गुरुवार को मुंबई के नानावटी अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और करीब 15 दिनों से अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
मुश्ताक खान उन कलाकारों में शामिल थे, जिन्हें किसी फिल्म में मुख्य भूमिका के लिए नहीं, बल्कि अपने छोटे मगर असरदार किरदार के लिए याद किया जाता है। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी भले ही कुछ मिनटों की होती थी, लेकिन संवाद अदायगी और अभिनय का अंदाज दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ जाता था।
‘वेलकम’ के बल्लू ने बना दी अलग पहचान
मुश्ताक खान के करियर की बात हो और ‘वेलकम’ का बल्लू याद न आए, ऐसा मुश्किल है। फिल्म में उन्होंने नाना पाटेकर के किरदार उदय शेट्टी के साथ नजर आने वाले बल्लू का रोल निभाया था। फिल्म के एक दृश्य में उनका नकली पैर और हॉकी वाला संवाद दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय हुआ। छोटे से किरदार को अपनी कॉमिक टाइमिंग से यादगार बना देना मुश्ताक खान की खासियत थी।
हालांकि उनकी पहचान सिर्फ ‘वेलकम’ तक सीमित नहीं रही। ‘हम हैं राही प्यार के’ में मिश्राजी, ‘आशिकी’ में रफू मास्टर और ‘गदर: एक प्रेम कथा’ में गुल खान जैसे किरदारों ने उन्हें अलग-अलग तरह के अभिनय के लिए पहचान दिलाई। ‘गदर 2’ में भी उन्होंने गुल खान का किरदार दोहराया था।
तीन दशक से ज्यादा का फिल्मी सफर
मुश्ताक खान ने हिंदी सिनेमा में लंबे समय तक काम किया। कॉमेडी से लेकर गंभीर भूमिकाओं तक उन्होंने कई तरह के किरदार निभाए। ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘सड़क’, ‘हेरा फेरी’, ‘जोड़ी नंबर 1’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वॉन्टेड’, ‘ओह माय गॉड!’, ‘स्त्री’, ‘गदर 2’ और ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों में भी वह नजर आए।
फिल्मों के अलावा टेलीविजन पर भी उन्होंने काम किया। यही वजह रही कि अलग-अलग दौर के दर्शक उनके अभिनय से परिचित रहे।
पहले भी दी थी कैंसर को मात
रिपोर्टों के मुताबिक मुश्ताक खान को करीब पांच साल पहले कैंसर का पता चला था। इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ था, लेकिन हाल में बीमारी दोबारा लौट आई। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ती गई और उन्हें मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 24 सितंबर को उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके करीबी लोगों ने उनके निधन की पुष्टि की है।
बताया गया है कि बीमारी के बावजूद वह हाल तक काम से जुड़े हुए थे। उनके निधन की खबर ने फिल्म जगत में उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और प्रशंसकों को गहरा दुख पहुंचाया है।
मुश्ताक खान का फिल्मी सफर इस बात की मिसाल रहा कि किसी कलाकार को यादगार बनने के लिए पर्दे पर सबसे ज्यादा समय मिलना जरूरी नहीं। उन्होंने छोटे-छोटे किरदारों में ऐसी छाप छोड़ी कि फिल्म खत्म होने के बाद भी उनका किरदार दर्शकों की याद में बना रहा। अब वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन बल्लू, गुल खान और उनके दूसरे किरदारों के जरिए उनकी अदाकारी लंबे समय तक दर्शकों के बीच जीवित रहेगी।
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