मिट्टी की घटती ताकत पर कृषि विभाग की चिंता, रबी गोष्ठी में प्रमुख सचिव बोले- खाद का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल रोके किसान

वाराणसी। रबी सीजन में गेहूं, सरसों और दलहन की पैदावार बढ़ाने के साथ खेतों की उर्वरता बचाने पर भी सरकार ने जोर देना शुरू कर दिया है। वाराणसी में आयोजित वाराणसी, प्रयागराज और विंध्याचल मंडल की संयुक्त रबी उत्पादन गोष्ठी-2026 में प्रमुख सचिव कृषि एम.के. शन्मुगा सुन्दरम ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि मिट्टी में कार्बन की मात्रा पहले करीब 1.5 प्रतिशत थी, जो घटकर 0.5 प्रतिशत तक पहुंचने की बात सामने आई है। उन्होंने चेताया कि मिट्टी की सेहत पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में खेती की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल में आयोजित गोष्ठी में तीनों मंडलों के मंडलायुक्त, मुख्य विकास अधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। बैठक में रबी फसलों की पैदावार बढ़ाने, उन्नत बीजों, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और किसानों की समस्याओं पर चर्चा हुई।
376 मिलियन टन तक पहुंचा देश का कृषि उत्पादन
प्रमुख सचिव कृषि ने कहा कि आजादी के समय देश का कृषि उत्पादन लगभग 50 मिलियन टन था, जो अब बढ़कर करीब 376 मिलियन टन हो गया है। उनके मुताबिक देश में लगभग 75 मिलियन टन कृषि उत्पादन सरप्लस है, जबकि उत्तर प्रदेश का योगदान करीब 74 मिलियन टन है। उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और संसाधनों के संतुलित इस्तेमाल को भी जरूरी बताया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीज और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर कोई बड़ी कमी नहीं है। किसानों को फसल की जरूरत और मिट्टी की जांच के अनुसार खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। खास तौर पर एनपीके के संतुलित प्रयोग, ढैंचा की बुवाई, खरपतवार नियंत्रण और धान की सीधी बुवाई यानी डीएसआर तकनीक को बढ़ावा देने की बात कही।

महिला किसानों की भूमिका पर भी दिया जोर
प्रमुख सचिव ने कहा कि देश के लगभग 15 करोड़ किसानों में करीब दो करोड़ महिलाएं हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में ढाई करोड़ किसानों में लगभग 20 लाख महिला कृषक हैं। उन्होंने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने काशी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की कृषि गोष्ठी के आयोजन को भी गौरव का विषय बताया और किसानों से आय बढ़ाने के लिए लगातार नए तरीके अपनाने की अपील की।
किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ी समस्याओं को शासन स्तर पर देखने और सुधार का प्रयास करने का आश्वासन भी दिया।
किसानों को इंटरनेट से बाजार तक पहुंच बनाने की सलाह
वाराणसी मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने किसानों से वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार खेती करने और इंटरनेट के माध्यम से घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने की अपील की। उन्होंने वाराणसी एयरपोर्ट पर स्थापित पैक हाउस का उल्लेख करते हुए बताया कि कृषि उत्पादों के भंडारण के लिए वातानुकूलित व्यवस्था की गई है।
उन्होंने चंदौली में रैक और पॉलीहाउस की मांग, गाजीपुर में प्याज की खेती के लिए ट्रांसप्लांटर मशीन पर सब्सिडी जैसे मुद्दों को शासन के सामने उठाने की बात कही। किसानों को पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसायों से भी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि वाराणसी मंडल में करीब साढ़े छह लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की खेती हो रही है।
सिंचाई और क्रय केंद्रों की समस्याएं भी उठीं
प्रयागराज मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने किसानों के खेतों तक नहरों का पानी पहुंचाने, बीज और उर्वरकों की उपलब्धता तथा किसान क्रेडिट कार्ड की समस्याओं के समाधान पर जोर दिया। उन्होंने फतेहपुर में केले की खेती की संभावनाओं का भी जिक्र किया।
विंध्याचल मंडलायुक्त राजेश प्रकाश ने सिंचाई और नहरों से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया।
गोष्ठी में किसानों ने अलग-अलग जिलों की समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। मिर्जापुर के प्रह्लाद सिंह ने अर्णव चक्रवात से फसलों को हुए नुकसान पर बीमा और मुआवजे की मांग की। उन्होंने जरगो पंप कैनाल और सिंचाई व्यवस्था की समस्याएं भी उठाईं। भदोही के इंद्रजीत मौर्य ने एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण पर चिंता जताई।
प्रयागराज के किसान सुनील कुमार ने मांडा क्षेत्र के हाटा में क्रय केंद्र खोलने की मांग की। कौशांबी के कुंवर चंद्र ने करारी में क्रय केंद्र और बासमती धान का उचित मूल्य दिलाने का मुद्दा उठाया। फतेहपुर के अखिलेश कुमार ने जैविक खेती में खरपतवार नियंत्रण के उपायों पर जानकारी देने की मांग की।

चंदौली में तूफान से नुकसान और सोलर फेंसिंग का मुद्दा
वाराणसी मंडल के किसानों ने भी कई समस्याएं रखीं। वाराणसी के दिनेश सिंह ने खेत की मेड़ पर लगे सागौन के पेड़ काटने को लेकर वन विभाग से होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया। चंदौली के शशिकांत राय ने अर्णव तूफान से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा और सोलर फेंसिंग पर अधिक अनुदान देने की मांग की।
गाजीपुर की अंजू चतुर्वेदी ने मिलेट्स से बने उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया। जौनपुर के बृजेश कुमार ने सब्जियों के निर्यात की प्रक्रिया आसान बनाने, जिले में एपीडा कार्यालय खोलने और जैविक खाद पर अनुदान बढ़ाने की मांग रखी।
सोनभद्र के बिरजू कुशवाहा ने घोरावल में खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों के 535 दिनों से जारी धरने का मुद्दा उठाया। चंदौली के किसानों ने बाणसागर परियोजना, सिंचाई विभाग के कार्यालय जिले में खोलने और विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण के विकल्प तलाशने की मांग की। किसानों ने तूफान से बर्बाद फसलों का तत्काल सर्वे कराने और प्रभावितों को राहत देने की भी अपील की।
यूपी का कृषि निर्यात 30 हजार करोड़ रुपये के पार
एपीडा के सीबी सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश से कृषि और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। उन्होंने कहा कि पहले देश में एपीडा के केवल पांच केंद्र थे, जबकि अब उत्तर प्रदेश में ही पांच केंद्र स्थापित हो चुके हैं। गोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने रबी फसलों में कीट और रोग नियंत्रण, उन्नत बीजों के चयन तथा जल संरक्षण के उपाय भी बताए।
किसानों को मिला ऋण और कृषि योजनाओं का लाभ
कार्यक्रम के दौरान जिला सहकारी बैंक मिर्जापुर की ओर से पवन तिवारी को तीन लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया। हर्ष वर्धन और सतीश उपाध्याय को रूफटॉप योजना के तहत लाभ दिया गया, जबकि राजकुमार को प्याज की खेती के लिए किट और बीज उपलब्ध कराए गए।
कार्यक्रम के अंत में संयुक्त निदेशक कृषि, वाराणसी मंडल शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने अतिथियों और किसानों का आभार जताया। गोष्ठी में अधिकारियों ने रबी उत्पादन लक्ष्य हासिल करने के लिए विभागीय समन्वय, समयबद्ध कार्ययोजना और किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने पर जोर दिया।
लेखक के बारे में
Ashutosh Kumar Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आशुतोष कुमार शर्मा पेशे से स्कूल प्रधानाचार्य हैं। पिछले 8 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र से जुड़े श्री शर्मा की डिजिटल मीडिया, नई तकनीकों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि तकनीक और मीडिया का समन्वय ही भविष्य की पत्रकारिता की दिशा तय करेगा। मीडिया को समाज का चौथा स्तंभ मानते हुए वे सच्चाई, तथ्यपरकता और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। Ashutosh Kumar Sharma की सभी खबरें देखें →
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