अब सिर्फ घर नहीं संभाल रहीं महिलाएं, संपत्ति की भी बन रहीं मालकिन; यूपी के रजिस्ट्री आंकड़ों ने दिखाई नई तस्वीर

वाराणसी। दीपावली पर घर में लक्ष्मी के आगमन की कामना के बीच उत्तर प्रदेश के संपत्ति बाजार में एक और बदलाव की तस्वीर सामने आई है। इस बार शुभ मुहूर्त में सोना-चांदी और वाहन खरीदने के साथ लोगों ने जमीन, मकान और फ्लैट में भी निवेश किया। खास बात यह रही कि कई जिलों में संपत्ति के दस्तावेज महिलाओं के नाम दर्ज कराए गए। कहीं हर 10 में से छह रजिस्ट्रियां महिलाओं के नाम हुईं, तो कहीं कुल खरीद में उनकी हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से भी अधिक रही।
यह बदलाव केवल त्योहार की खरीदारी का आंकड़ा नहीं है। संपत्ति के कागजों पर महिलाओं का नाम दर्ज होना उनके कानूनी मालिकाना हक, आर्थिक सुरक्षा और परिवार की संपत्ति में हिस्सेदारी से जुड़ा विषय भी है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि महिला के नाम रजिस्ट्री होने का मतलब हर मामले में यह नहीं है कि खरीदारी का फैसला या भुगतान भी उसी महिला ने किया हो।
वाराणसी में 297 रजिस्ट्रियों में 180 महिलाओं के नाम
काशी में धनतेरस के दिन जमीन और मकान की खरीदारी को लेकर निबंधन कार्यालयों में अच्छी-खासी हलचल रही। जिले में एक ही दिन में 297 संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई। इनमें 180 संपत्तियां महिलाओं के नाम दर्ज कराई गईं। इस तरह कुल रजिस्ट्रियों में महिलाओं के नाम का हिस्सा करीब 60.6 प्रतिशत रहा।
इन रजिस्ट्रियों से सरकार को स्टांप शुल्क और निबंधन फीस के रूप में 5.38 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। निबंधन विभाग के अनुसार, 180 में से महिलाओं के नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री परिवार के पुरुषों ने कराई। यानी यहां महिलाओं के नाम पर कानूनी स्वामित्व देने का चलन तो स्पष्ट दिखा, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट यह नहीं बताती कि कितनी महिलाओं ने खुद खरीदारी का भुगतान किया।

बलिया में जनवरी से अब तक 62.37 फीसदी रजिस्ट्रियां महिलाओं के नाम
महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी की सबसे उल्लेखनीय तस्वीर बलिया से सामने आई है। जिले की छह तहसीलों में जनवरी 2026 से नवंबर की शुरुआत तक कुल 18,894 रजिस्ट्रियां दर्ज की गईं। इनमें 11,784 संपत्तियां महिलाओं के नाम रहीं, जबकि 7,110 रजिस्ट्रियां पुरुषों के नाम हुईं। इस अवधि में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 62.37 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं को स्टांप शुल्क में करीब 19 करोड़ रुपये से अधिक की छूट का लाभ मिला। यह आंकड़ा केवल धनतेरस या दीपावली के दिनों का नहीं, बल्कि जनवरी से नवंबर की शुरुआत तक का है। इसलिए इसे त्योहार का आंकड़ा नहीं, बल्कि जिले में पूरे साल के दौरान सामने आए रुझान के रूप में देखना चाहिए।
कासगंज में धनतेरस पर 47 में से 27 रजिस्ट्रियां महिलाओं के नाम
कासगंज में धनतेरस पर कुल 47 संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई। इनमें 27 महिलाओं और 20 पुरुषों के नाम पर रजिस्ट्रियां दर्ज की गईं। इस तरह उस दिन महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 57.4 प्रतिशत रही। जिले में सामान्य दिनों में औसतन करीब 30 रजिस्ट्रियां होती हैं, जबकि धनतेरस पर यह संख्या बढ़कर 47 पहुंच गई। यह आंकड़ा दिखाता है कि शुभ मुहूर्त में संपत्ति खरीद के साथ महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने का विकल्प भी परिवारों ने अपनाया।
मऊ में एक सप्ताह के भीतर 266 रजिस्ट्रियां, करीब आधी महिलाओं के नाम
मऊ सदर तहसील में 30 अक्टूबर से 6 नवंबर के बीच कुल 266 संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई। इनमें 130 संपत्तियां महिलाओं के नाम दर्ज की गईं। यानी इस अवधि में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 48.9 प्रतिशत रही। तहसील के आंकड़ों में अक्टूबर महीने की तस्वीर भी सामने आई। पूरे अक्टूबर में 970 रजिस्ट्रियां हुईं, जिनमें 327 महिलाओं के नाम दर्ज थीं। इससे पता चलता है कि महिलाओं के नाम पर संपत्ति दर्ज कराने का चलन केवल धनतेरस तक सीमित नहीं है
चंदौली में दो दिनों में 75 रजिस्ट्रियां, 34 महिलाओं के नाम
चंदौली के पीडीडीयू नगर तहसील क्षेत्र में धनतेरस और दीपावली से एक दिन पहले, यानी दो दिनों में कुल 75 रजिस्ट्रियां हुईं। इनमें 34 संपत्तियां महिलाओं के नाम दर्ज हुईं। इस तरह दो दिनों की कुल रजिस्ट्रियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 45.33 प्रतिशत रही। धनतेरस के दिन 43 रजिस्ट्रियों में 23 महिलाओं के नाम थीं, जबकि अगले दिन 32 में से 11 संपत्तियां महिलाओं के नाम दर्ज की गईं।

लखनऊ में 915 रजिस्ट्रियों से 18.79 करोड़ का राजस्व
राजधानी लखनऊ में धनतेरस पर संपत्ति की खरीदारी का बड़ा कारोबार हुआ। जिले के निबंधन कार्यालयों में कुल 915 रजिस्ट्रियां दर्ज की गईं। इनसे सरकार को स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क के रूप में 18.79 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। मोहनलालगंज में 154 रजिस्ट्रियां हुईं, जबकि बीकेटी में 149 बैनामे दर्ज किए गए। सरोजनीनगर प्रथम में 120 और सरोजनीनगर द्वितीय में 122 रजिस्ट्रियां हुईं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में लखनऊ की कुल 915 रजिस्ट्रियों में महिलाओं के नाम दर्ज संपत्तियों की अलग संख्या नहीं दी गई है।
महिलाओं के नाम रजिस्ट्री पर क्यों मिलती है छूट?
उत्तर प्रदेश में महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने पर स्टांप शुल्क में रियायत देने की व्यवस्था लंबे समय से लागू है। जुलाई 2025 में इस छूट का दायरा बढ़ाकर एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति के लिए एक प्रतिशत की रियायत कर दिया गया। अधिकतम बचत एक लाख रुपये तक हो सकती है। इस प्रोत्साहन का उद्देश्य महिलाओं के नाम संपत्ति का पंजीकरण बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाना है।
इसी नीति का असर राज्य के पिछले वर्षों के आंकड़ों में भी दिखाई देता है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में प्रदेश की कुल संपत्ति रजिस्ट्रियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 58.07 प्रतिशत थी। 2023 में यह 56.03 प्रतिशत और 2024 में 55.75 प्रतिशत रही। वर्ष 2024 में प्रदेश में कुल 26,19,823 बिक्री विलेख दर्ज हुए, जिनमें 14,63,939 महिलाओं के पक्ष में थे। ये वार्षिक आंकड़े हैं, इन्हें दीपावली 2026 का औसत नहीं माना जाना चाहिए।
रजिस्ट्री में नाम से आगे भी है असली सशक्तीकरण की कसौटी
किसी महिला के नाम जमीन, मकान या दुकान दर्ज होना उसके लिए कानूनी अधिकार का आधार बनता है। इससे भविष्य में संपत्ति पर दावा, उत्तराधिकार और आर्थिक सुरक्षा के अवसर मजबूत हो सकते हैं। लेकिन केवल कागजों पर नाम दर्ज होना ही पर्याप्त नहीं है। महिला को संपत्ति के इस्तेमाल, बिक्री, किराये और उससे जुड़े आर्थिक फैसलों में भी वास्तविक अधिकार मिलना जरूरी है।
वाराणसी की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि महिलाओं के नाम दर्ज 180 संपत्तियों की रजिस्ट्री परिवार के पुरुषों ने कराई। इससे यह भी समझ आता है कि महिलाओं के नाम संपत्ति दर्ज कराने के पीछे सरकारी छूट और पारिवारिक फैसले दोनों की भूमिका हो सकती है। इसलिए रजिस्ट्री के आंकड़ों को सीधे महिलाओं की व्यक्तिगत आर्थिक स्वतंत्रता का पूरा प्रमाण मानना ठीक नहीं होगा।
फिलहाल जिलों से सामने आई तस्वीर यही बताती है कि उत्तर प्रदेश में संपत्ति के दस्तावेजों पर महिलाओं की मौजूदगी मजबूत है। कहीं त्योहार के दिन उनकी हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से ऊपर पहुंची, तो कहीं सालभर के आंकड़ों में भी उनका हिस्सा पुरुषों से अधिक दर्ज हुआ। अब असली सवाल यह है कि संपत्ति के कागजों पर दर्ज यह अधिकार महिलाओं के आर्थिक फैसलों और वास्तविक नियंत्रण में कितना बदल रहा है।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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