2027 के रण में भाजपा का नया दांव, योगी सरकार के MLC मंत्रियों को भी जनता के बीच उतरना पड़ सकता है!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। पार्टी अब केवल मौजूदा विधायकों और नए चेहरों के प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि योगी सरकार में विधान परिषद सदस्य (MLC) रहते हुए मंत्री पद संभाल रहे नेताओं की चुनावी क्षमता को भी परखने की तैयारी में है। पार्टी की रणनीति से जुड़े हालिया मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विधान परिषद के रास्ते मंत्री बने कई वरिष्ठ नेताओं को भी विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा जा सकता है।
इस रणनीति का संकेत है कि पार्टी में वरिष्ठ पद या मंत्री होना अपने आप में टिकट की गारंटी नहीं होगा। बड़े नेताओं को भी जनता के बीच जाकर चुनावी समर्थन साबित करना पड़ सकता है।
MLC मंत्रियों के सामने भी चुनाव लड़ने की चुनौती
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, योगी सरकार में विधान परिषद सदस्य रहते हुए मंत्री बने नेताओं को 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ाने की योजना पर चर्चा है। इनमें कैबिनेट स्तर के वरिष्ठ नेताओं के साथ स्वतंत्र प्रभार और राज्य मंत्री स्तर के कुछ चेहरे भी शामिल हो सकते हैं।
इससे पहले जून 2026 में आई रिपोर्टों में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह, भूपेंद्र सिंह चौधरी, ए.के. शर्मा और दारा सिंह चौहान जैसे MLC मंत्रियों के विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना का जिक्र किया गया था। हालांकि, इन नामों को अंतिम उम्मीदवार मानना अभी सही नहीं होगा। टिकट और सीटों पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।

केवल मंत्री पद नहीं, चुनावी प्रदर्शन भी बनेगा कसौटी
भाजपा की रणनीति में इस बार उम्मीदवारों के चयन के लिए सर्वे और क्षेत्रीय फीडबैक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व अलग-अलग स्तर पर चुनावी आकलन करा रहा है। इसमें जनप्रतिनिधियों की क्षेत्र में सक्रियता, संगठन के साथ तालमेल, जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता और चुनावी प्रदर्शन जैसे पहलुओं को परखा जा सकता है।
अक्टूबर में शिक्षक और स्नातक खंड की विधान परिषद सीटों के चुनाव को लेकर भी पार्टी ने विधायकों की जिम्मेदारी तय की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, इन चुनावों में विधानसभा क्षेत्रों के प्रदर्शन और युवा तथा बुद्धिजीवी वर्ग के बीच पार्टी की पकड़ को भी आकलन का हिस्सा बनाया गया।
बड़े चेहरों को मैदान में उतारकर आसपास की सीटों पर भी नजर
भाजपा की रणनीति का एक अहम पहलू वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को सीधे चुनाव मैदान में उतारना भी बताया जा रहा है। पार्टी को उम्मीद हो सकती है कि बड़े नेताओं की उम्मीदवारी से संबंधित विधानसभा सीट के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी संगठन को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा संगठन में लंबे समय से काम कर रहे कुछ पदाधिकारियों को भी विधानसभा चुनाव लड़ाने पर विचार किया जा सकता है। राज्यसभा सदस्यों और विधान परिषद सदस्यों के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी पार्टी स्तर पर मंथन की खबरें हैं।
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