इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती: गृह मंत्रालय के सचिव की जगह डिप्टी डायरेक्टर ने दिया हलफनामा, कोर्ट ने 16 नवंबर तक मांगा सही जवाब

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से अदालत के निर्देश का पालन करने के तरीके पर नाराजगी जताई है। साइबर अपराध से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने गृह मंत्रालय के संबंधित सचिव को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन उनकी जगह भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के डिप्टी डायरेक्टर ने जवाब दाखिल कर दिया। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि जब हलफनामा सचिव से मांगा गया है तो उसे किसी दूसरे अधिकारी के माध्यम से दाखिल नहीं कराया जा सकता।
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने कुबेर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि संबंधित सचिव की ओर से हलफनामा दाखिल किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी।
25 फरवरी को कोर्ट ने दिया था हलफनामे का निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 25 फरवरी 2026 को आदेश दिया था कि राष्ट्रीय साइबर अपराध से जुड़े मामलों को देखने वाले गृह मंत्रालय के सचिव जांच की स्थिति पर हलफनामा दाखिल करें। अदालत यह जानना चाहती थी कि संबंधित बैंक ने मामले में क्या कार्रवाई की है और जांच किस स्तर तक पहुंची है।
लेकिन निर्धारित निर्देश के अनुसार सचिव का हलफनामा दाखिल होने के बजाय भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के एक डिप्टी डायरेक्टर की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया। इसी प्रक्रिया पर खंडपीठ ने आपत्ति जताई।

कोर्ट ने कहा- निर्देश का पालन उसी स्तर से होना चाहिए
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि संभव है गृह मंत्रालय में राष्ट्रीय साइबर अपराध मामलों के लिए अलग से कोई सचिव पद निर्धारित न हो, लेकिन जब अदालत ने मंत्रालय के सचिव को हलफनामा देने का निर्देश दिया है तो जवाब मंत्रालय के किसी सचिव की ओर से ही आना चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी अधीनस्थ अधिकारी का हलफनामा दाखिल कर देना, सचिव से मांगे गए जवाब का विकल्प नहीं हो सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने मंत्रालय को अपने निर्देश का सही तरीके से पालन करने को कहा।
याचिकाकर्ता को भी लेनदेन का ब्योरा देने का समय
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता कुबेर सिंह के अधिवक्ता को खाते में हुए विभिन्न लेनदेन का स्पष्ट विवरण देते हुए पूरक प्रति-शपथपत्र दाखिल करने का अवसर दिया है। अदालत ने कहा कि सुनवाई के दौरान जिन तथ्यों और लेनदेन का उल्लेख किया जाना है, उन्हें दस्तावेज के रूप में भी रिकॉर्ड पर रखा जाए।
इससे मामले में बैंक की कार्रवाई और खाते से जुड़े वित्तीय लेनदेन की स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।
24 घंटे में गृह मंत्रालय तक पहुंचेगा कोर्ट का आदेश
खंडपीठ ने आदेश दिया है कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से आदेश 24 घंटे के भीतर दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजा जाए, ताकि इसे गृह मंत्रालय के सचिव तक पहुंचाया जा सके। आदेश की तामील की रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले अदालत के रिकॉर्ड पर रखने का भी निर्देश दिया गया है।
अब इस मामले में 16 नवंबर को सुनवाई होगी। उस दिन अदालत के सामने यह स्पष्ट होना है कि गृह मंत्रालय की ओर से निर्धारित निर्देश के अनुरूप हलफनामा दाखिल किया गया है या नहीं।
मामले का महत्व: यह आदेश बताता है कि अदालत जब किसी वरिष्ठ अधिकारी से व्यक्तिगत या पदेन स्तर पर जवाब मांगती है, तो उस निर्देश का पालन उसी निर्धारित स्तर पर होना चाहिए। साइबर अपराध से जुड़े इस मामले में अब बैंक की कार्रवाई और जांच की स्थिति पर भी अदालत की नजर रहेगी।
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Anup Sharma
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