शिव कृपा और साधना का पवित्र मास श्रावण

क्या आप जानते हैं कि महादेव को सावन (श्रावण) मास इतना प्रिय क्यों है?
श्रावण मास केवल वर्षा ऋतु का आगमन नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक वैदिक महायज्ञ है। आइए जानते हैं सावन से जुड़े कुछ अद्भुत रहस्य
श्रावण मास से जुड़े मुख्य रहस्य
माता पार्वती की तपस्या: सती रूप में देह त्याग करने के बाद, माता पार्वती ने श्रावण मास में ही कठोर निराहार तपस्या करके महादेव को पुन: पति रूप में प्राप्त किया था।
सृष्टि की रक्षा: श्रावण मास में ही समुद्र मंथन हुआ था। हलाहल विष का पान करके भगवान शिव 'नीलकंठ' कहलाए। विष के संताप को शांत करने के लिए देवताओं ने उनका जलाभिषेक किया था, इसीलिए सावन में जल अर्पित करने का विशेष महत्व है।
सृष्टि का संचालन: चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, उस समय इन चार महीनों के लिए सृष्टि संचालन का दायित्व भगवान शिव के हाथों में होता है।
श्रावण सोमवार का रहस्य
सोमवार का अंक 2 है, जो चंद्रमा का प्रतीक है। चंद्रमा मन का कारक है और भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान है। शिव पूजा से मन एकाग्र होता है और सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिलती है।
अभिषेक का पुण्य
शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव स्वयं ही जल स्वरूप हैं। इसलिए रुद्राभिषेक (जल, दूध, घी, शहद, गंगाजल) करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
भगवान भोलेनाथ बहुत भोले हैं, वे केवल एक लोटा जल और बेलपत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुराणों में शिव जी को अर्पित किए जाने वाले पुष्पों का भी एक विशेष क्रम और फल वर्णित है?
दान और पुण्य का अद्भुत क्रम
1 'आक' (मदार) का फूल = स्वर्ण दान के समान फल
1000 आक के फूल = 1 कनेर का फूल
1000 कनेर के फूल = 1 बेलपत्र (बिल्व पत्र)
1000 बेलपत्र = 1 द्रोण (गुमा) फूल
1000 द्रोण फूल = 1 अपामार्ग (चिरचिटा)
1000 अपामार्ग = 1 कुश फूल
1000 कुश फूल = 1 शमी पत्र
1000 शमी पत्र = 1 नीलकमल
1000 नीलकमल = 1 धतूरा फूल
1000 धतूरा फूल = 1 शमी का फूल (सबसे अधिक पुण्यदायी)
बेलपत्र का चमत्कार
एक बार एक भील डाकू अनजाने में बेल के पेड़ पर बैठकर रात भर पत्ते तोड़कर नीचे स्थित शिवलिंग पर गिराता रहा। इस अनजाने में हुए अभिषेक से भी शिव जी प्रसन्न होकर प्रकट हो गए! जब भगवान शिव एक डाकू पर कृपा कर सकते हैं, तो हम भक्तों पर क्यों नहीं?
आज ही महादेव को अपनी श्रद्धा का बेलपत्र अर्पित करें।
ॐ नमः शिवाय!
हरियाली तीज : प्रेम और उल्लास का पर्व
श्रावण मास केवल तपस्या का ही नहीं, बल्कि प्रेम और उल्लास का भी महीना है। इस मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को 'हरियाली तीज' मनाई जाती है।
मान्यता: माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी 'हरियाली तीज' के दिन उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।
व्रत का महत्व: कुंवारी कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए और सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं।
हरा रंग और प्रकृति:
इस दिन हरी चूड़ियां और हरे वस्त्र पहनने का विशेष विधान है, जो श्रावण की प्रकृति से जुड़ने का प्रतीक है।
मेहंदी के औषधीय गुण: मेहंदी सुहाग का प्रतीक तो है ही, साथ ही इसकी तासीर ठंडी होती है। सावन में यह क्रोध को नियंत्रित करती है और मन में प्रेम व शीतलता बनाए रखती है।
जिस प्रकार सावन की वर्षा की बूंदें धरती की प्यास बुझाकर उसे हरा-भरा और सुंदर बना देती हैं, ठीक उसी प्रकार सुहागिन स्त्रियां अपने प्रेम से परिवार को खुशियों से भर देती हैं।
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