श्रावण में रुद्री पाठ का अद्भुत महत्व

रुद्राभिषेक में कितने पाठ का क्या महत्व है?
सनातन धर्म में वार (दिन) और तिथि के अनुसार व्रत व पूजन का विशेष महत्व बताया गया है।
दिन के अनुसार व्रत:
सोमवार: भगवान शिव (सावन में अतिप्रिय)
मंगलवार: मंगला गौरी व्रत
बुधवार: बुध गणपति व्रत
बृहस्पतिवार: बृहस्पति देव व्रत
शुक्रवार: जीवंतिका देवी व्रत
शनिवार: बजरंग बली व नरसिंह व्रत
रविवार: सूर्य व्रत
तिथि के स्वामी (देवता):
प्रतिपदा- अग्नि | द्वितीया- ब्रह्मा | तृतीया- गौरी | चतुर्थी- श्री गणेश | पंचमी- सर्प | षष्ठी- कार्तिकेय (स्कंद) | सप्तमी- सूर्य | अष्टमी- शिव | नवमी- दुर्गा | दशमी- यम | एकादशी- विश्वदेव | द्वादशी- श्री हरि विष्णु | त्रयोदशी- कामदेव | चतुर्दशी- शिव | अमावस्या- पितृ | पूर्णिमा- चंद्र देव।
श्रावण में रुद्री पाठ का अद्भुत महत्व
शिव पूजक को सर्वप्रथम संकल्प लेकर शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए। ब्राह्मणों द्वारा 'रुद्राष्टाध्यायी' का पाठ करवाने और श्रवण करने के अलग-अलग फल होते हैं:
1 पाठ: बाल ग्रहों की शांति
3 पाठ: उपद्रवों की शांति, कामना सिद्धि व शत्रु नाश
5 पाठ: ग्रहों की शांति व वशीकरण
7 पाठ: भय से मुक्ति व सुख की प्राप्ति
9 पाठ: पुत्र, धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति
11 पाठ (एक रुद्र): विविध विभूतियों की प्राप्ति
इसी प्रकार महारुद्र पाठ से असाध्य कार्यों की सिद्धि, राजभय का नाश, अकाल मृत्यु से रक्षा और आरोग्य प्राप्त होता है।
रुद्राभिषेक: किस द्रव्य (तरल) से क्या मिलता है?
भगवान शंकर का अभिषेक विभिन्न द्रव्यों से करने पर महादेव अत्यंत प्रसन्न होकर मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं:
जल: वर्षा की प्राप्ति
कुशा का जल: घर में शांति
दही: पशु व वाहन सुख
गन्ने का रस (ईख): लक्ष्मी (धन) की प्राप्ति
मधु (शहद) और घी: धन प्राप्ति व पापों का क्षय
दूध / शक्कर मिला दूध: पुत्र प्राप्ति, प्रमेह रोग से मुक्ति व निर्मल बुद्धि
गंगाजल: मोक्ष की प्राप्ति
सरसों या तिल का तेल: शत्रुओं का नाश व रोगमुक्ति
शिव पूजन में फूलों का महत्व:
धन-धान्य की प्राप्ति: कमल, बेलपत्र, शतपत्र और शंखपुष्प।
मान-सम्मान की वृद्धि: आक के फूल।
शत्रु नाश: जवा पुष्प।
रोग मुक्ति व संपत्ति: कनेर के फूल।
संपदा में वृद्धि: हरसिंगार के फूल।
ज्वर व विषभय से मुक्ति: भांग और धतूरा।
अखंड धन: साबुत चावल (अक्षत)।
विशेष ध्यान दें: भगवान शिव की पूजा में चंपा और केतकी के फूलों का प्रयोग वर्जित है, इन्हें छोड़कर अन्य पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं।
पूजा और रुद्राभिषेक के बाद 11 बत्तियों वाला दीपक जलाकर महादेव की आरती अवश्य करें।
।। ॐ नमः शिवाय ।।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
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