श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भारतीय संस्कृति, संगीत और लोकपरंपराओं के उत्सव का पर्व: विभा सिंह

लखनऊ। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह ने प्रदेशवासियों, कलाकारों, संगीतज्ञों, नृत्य एवं रंगमंच से जुड़े सभी साधकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
विभा सिंह ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण भारतीय संस्कृति के ऐसे विराट नायक हैं, जिनके जीवन में दर्शन, संगीत, नृत्य, नाट्य, लोकपरंपरा और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनकी बांसुरी की मधुर तान से लेकर ब्रज की रासलीला तक, श्रीकृष्ण भारतीय कला-संस्कृति की आत्मा में रचे-बसे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत में श्रीकृष्ण से जुड़ी परंपराओं का विशेष स्थान है। ब्रज की रासलीला, लोकगीत, कथक, शास्त्रीय संगीत तथा विभिन्न लोककलाओं में श्रीकृष्ण की लीलाओं और जीवन-दर्शन की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। जन्माष्टमी इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और कलाकारों को अपनी कला के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
अकादमी की उपाध्यक्ष ने कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश केवल पूजा और उत्सव तक सीमित नहीं है। भगवद्गीता में दिया गया कर्म और कर्तव्य का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। वर्तमान समय में आवश्यकता है कि हम श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य, कर्तव्य, प्रेम, करुणा, धैर्य और सामाजिक सद्भाव को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और कला-साधकों का आह्वान करते हुए कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत तभी जीवंत रहेगी, जब नई पीढ़ी उससे जुड़ेगी। संगीत, नृत्य, नाट्य और लोककलाओं के माध्यम से श्रीकृष्ण की सांस्कृतिक परंपरा को देश-दुनिया तक पहुँचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विभा सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी प्रदेश की समृद्ध कला परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। जन्माष्टमी जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़ने के साथ-साथ ‘संस्कृति से संवाद और नई पीढ़ी से जुड़ाव’ का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस जन्माष्टमी को केवल धार्मिक उत्सव के रूप में न मनाकर संगीत, नृत्य, नाट्य और लोककला के माध्यम से भारतीय संस्कृति के उत्सव के रूप में भी मनाएं। “आइए, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर हम संकल्प लें कि अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाएंगे तथा उत्तर प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर और अधिक प्रतिष्ठित करेंगे।”
लेखक के बारे में
Syed Fiza Khatoon
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