राम वन गमन का सजीव मंचन देख छलक उठीं दर्शकों की आंखें, प्रभु श्रीराम के वनवास के दृश्य ने हर दिल को किया भावुक

बलिया। नगरा सार्वजनिक रामलीला समिति के तत्वाधान में जनता इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित रामलीला के सातवे दिन शनिवार को श्रीराम के राजतिलक की घोषणा, कैकेयी कोप भवन व वनगमन की लीला का मंचन किया गया। राम वन गमन का सजीव मंचन देखकर दर्शकों की आंखे नम हो गई।
कलाकारों द्वारा मंचित लीला के अनुसार श्रीराम के राजतिलक की घोषणा के प्रसंग में राजा दशरथ, गुरु वशिष्ठ अपने अमात्यों से विचार-विमर्श करते हैं। सब लोग श्रीराम को राजगद्दी सौपने का समर्थन करते हैं। श्रीराम के राजतिलक की सूचना मिलने पर कैकेयी की दासी मंथरा चिंतित हो जाती है और भरत के राजतिलक के लिए कुटिल चाल चलती है।

मंथरा कैकेयी के पास जाती है और उसे राजा दशरथ, श्रीराम और कौशल्या के खिलाफ भड़काती है। मंथरा कहती है कि श्रीराम के राजा बन जाने पर भरत राम के दास हो जाएगें और कैकेयी कौशल्या की दासी बन जाएगी। पहले तो कैकेयी के ऊपर मंथरा के बातों का कोई असर नहीं होता है लेकिन धीरे-धीरे वह मंथरा की कुटिल चालों में आ जाती है। मंथरा उससे कोप भवन में जाने और अतीत में दशरथ द्वारा दिए गए दो वरदानों को मांगने को कहती है। कैकेयी सारे आभूषण उतार देती है और बालों को खोलकर कोपभवन में चली जाती है। राजा दशरथ को सूचना मिलती है तो वे कोप भवन में जाते हैं जहां कैकेयी रहती है।

वे कैकेयी से कोपभवन में रहने का कारण पूछते है तो कैकेयी उन्हें देवासुर संग्राम की याद दिलाती है और उनके द्वारा दिए गए दो वरदानों को मांगती है। पहले वरदान में भरत को राजगद्दी और दूसरे में श्रीराम को 14 वर्ष के लिए वनवास। यह सुनकर राजा दशरथ व्यथित हो जाते हैं वे कैकेयी को मनाते हैं लेकिन वह नहीं मानती। जब यह बात श्रीराम को मालूम होता है तो अपने पिता के पास आते हैं तो कैकेयी उन्हें सारी बात बताती है।
यह सुनकर राम कहते हैं कि यह मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है कि मेरे अनुज को राजगद्दी मिले और मै जंगलों में ऋषि-मुनियों का दर्शन कर कृतार्थ हो जाऊं।राम के वन जाने की बात सुनकर माता सीता और अनुज लक्ष्मण भी राम के साथ वन जाने की जिद करते हैं। अंततः राम, लक्ष्मण व माता सीता के साथ वन गमन की तैयारी करते हैं और मुनिवेश धारण वन को चलते जाते हैं। यह दृश्य देखकर उपस्थित सैकड़ो दर्शकों की आंखे नम हो गई। पूरा पंडाल जय सियाराम की उद्घोष से गूंज उठा।
लीला का शुभारंभ रसड़ा नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सोनी, विशाल जी, राजीव वर्मा एवं नेत्र चिकित्सक डॉ आरएस वर्मा ने भगवान की आरती पूजन कर किया। निर्भय प्रकाश, राजेश गुप्ता, रामायण ठाकुर, शशि प्रकाश कुशवाहा, हरेराम गुप्ता, मन्नू मद्धेशिया, कृष्ण पाल यादव, गणपति गोड़, अनील गुप्ता, रियांशु जायसवाल, अमन कुमार, आदि उपस्थित रहे।
लेखक के बारे में
शैलेन्द्र कुमार सिंह
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