धनतेरस पर काशी में खुला मां अन्नपूर्णा का दिव्य दरबार, पांच दिन तक भक्तों को मिलेगा ‘समृद्धि का खजाना’

स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु, सिक्कों और धान के लावे का प्रसाद बांटने की परंपरा; 10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव के बाद एक साल के लिए बंद होंगे विशेष दर्शन
वाराणसी। धर्म और आस्था की नगरी काशी में धनतेरस के साथ ही मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन का विशेष अवसर शुरू हो गया है। शुक्रवार, 6 नवंबर की सुबह विधि-विधान से पूजन और आरती के बाद मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। मां के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई। इस पांच दिवसीय आयोजन में श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ मां का ‘खजाना प्रसाद’ भी दिया जा रहा है।
साल में सिर्फ पांच दिन होते हैं स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन
मां अन्नपूर्णा मंदिर में स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन साल में विशेष रूप से धनतेरस से अन्नकूट तक पांच दिनों के लिए होते हैं। इस बार 6 से 10 नवंबर तक श्रद्धालु मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। धनतेरस की भोर में करीब तीन बजे विशेष पूजन शुरू हुआ और आरती के बाद सुबह पांच बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन प्रारंभ किए गए।
इस दौरान भक्तों को मां अन्नपूर्णा के साथ भूमि देवी, मां लक्ष्मी और रजत महादेव के दर्शन का अवसर भी मिल रहा है। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, बाबा विश्वनाथ ने मां अन्नपूर्णा से अन्न की भिक्षा मांगी थी। इसी परंपरा और अन्न-धन के महत्व को याद करते हुए यहां हर वर्ष यह विशेष आयोजन होता है।

सिक्के और लावा बनते हैं ‘खजाना प्रसाद’
इस आयोजन का सबसे खास आकर्षण मां का खजाना प्रसाद है। श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में धान का लावा और सिक्के दिए जा रहे हैं। मंदिर में 21 किलो के रजत खजाने का पूजन भी किया गया है। इस बार करीब 8 से 10 लाख रुपये के सिक्के श्रद्धालुओं में वितरित किए जाने की तैयारी की खबर है।
भक्त इस प्रसाद को श्रद्धा के साथ अपने घर ले जाते हैं और तिजोरी या अन्न भंडार में रखते हैं। मान्यता है कि मां का खजाना घर में रखने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अन्न-धन की कमी नहीं होती। यह धार्मिक आस्था से जुड़ी परंपरा है।

दर्शन के समय और आने-जाने का रास्ता
धनतेरस के दिन विशेष दर्शन सुबह पांच बजे से रात 11:30 बजे तक निर्धारित किए गए हैं। इसके बाद 7 से 10 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह पांच बजे से रात 11:15 बजे तक दर्शन किए जा सकेंगे।
श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश की व्यवस्था बांसफाटक की ओर से गेट नंबर एक, ढुंढिराज मार्ग के रास्ते की गई है। मंदिर में बनाई गई अस्थायी सीढ़ियों से दर्शन के लिए पहुंचा जा सकेगा। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को कालिका गली की ओर से बाहर निकलना होगा। इससे भीड़ को नियंत्रित करने और आवागमन को व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी।
10 नवंबर को अन्नकूट, महाआरती के बाद बंद होंगे पट
पांच दिवसीय आयोजन का समापन 10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव के साथ होगा। इस अवसर पर मंदिर में लड्डुओं और विभिन्न पकवानों की भव्य झांकी सजाई जाएगी। मां को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। रात करीब 11:30 बजे महाआरती के बाद स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के विशेष दर्शन वाले कपाट एक वर्ष के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम
श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। सीसीटीवी कैमरों से कंट्रोल रूम के जरिए निगरानी रखी जा रही है। भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रवेश और निकास के लिए एकल मार्ग व्यवस्था लागू की गई है। पुलिसकर्मियों के साथ सेवादार और मेडिकल टीम भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तैनात हैं।
काशी में मां अन्नपूर्णा का यह पांच दिवसीय आयोजन केवल दर्शन का अवसर नहीं, बल्कि अन्न, दान और समृद्धि से जुड़ी सदियों पुरानी आस्था का उत्सव भी है। इसी परंपरा के चलते हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के स्वर्णमयी दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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