जंतर-मंतर हिंसा की जांच में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, कम शिकायतों के बावजूद एक महीने में रिपोर्ट देने का आदेश

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस की कथित ज्यादती के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार, 5 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उच्चस्तरीय जांच समिति (HPEC) से कहा कि वह उपलब्ध शिकायतों, वीडियो और अन्य दस्तावेजों के आधार पर एक महीने के भीतर अपनी पहली तथ्य-जांच रिपोर्ट सौंपे।
शिकायतें कम, जांच में अब तक नहीं निकला निष्कर्ष
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जांच समिति की ओर से शिकायतें आमंत्रित करने के लिए व्यापक प्रयास किए गए, लेकिन इसके बावजूद प्रभावित लोगों की तरफ से बहुत कम शिकायतें प्राप्त हुई हैं। समिति ने 149 समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित कराए थे। इसके बाद 21 अक्टूबर को दोबारा शिकायतें मांगी गईं और ऑनलाइन पोर्टल तथा कार्यालय के माध्यम से आवेदन देने की व्यवस्था की गई।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि समिति को शिकायतों का अनिश्चितकाल तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अब तक मिले साक्ष्यों और उपलब्ध सामग्री के आधार पर संबंधित पक्षों से जवाब लेकर जांच आगे बढ़ाई जाए। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ितों की ओर से याचिकाकर्ताओं द्वारा पहले से उपलब्ध कराई गई सामग्री को भी जांच में शामिल किया जाए।

पैलेट गन और महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामले प्राथमिकता में
सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए कुछ गंभीर पहलुओं को प्राथमिकता देने को कहा है। इनमें पैलेट गन के कथित इस्तेमाल, प्रदर्शन के दौरान लक्षित हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और दोनों पक्षों की ओर से हुई हिंसा तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप शामिल हैं।
समिति को पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ हुई कथित हिंसा की भी जांच करनी है। अदालत ने कहा है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर अंतरिम रिपोर्ट भी दी जा सकती है।
पूर्व जज की अध्यक्षता में गठित हुई थी समिति
इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शालिंदर कौर और सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला भी शामिल किए गए थे।

क्या था जंतर-मंतर आंदोलन?
जुलाई 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च किया था। 20 जुलाई को मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ। इस दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती के साथ ही सुरक्षाकर्मियों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगे थे।
इन्हीं घटनाओं की निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों के आरोपों की पड़ताल के लिए सुप्रीम कोर्ट ने समिति बनाई थी। अब अदालत के ताजा निर्देश के बाद जांच समिति को एक महीने में अपनी पहली रिपोर्ट देनी होगी।
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