आरटीआई में दो साल तक सूचना नहीं देने पर तीन पूर्व एसडीएम पर गिरी गाज, राज्य सूचना आयोग ने लगाया 25 हजार रुपये का जुर्माना, वेतन से होगी वसूली

लखनऊ। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना करीब दो साल तक उपलब्ध नहीं कराने और राज्य सूचना आयोग के नोटिसों की अनदेखी करने पर कानपुर देहात की तहसील सिकंदरा में तैनात रहे तीन पूर्व उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) पर कुल 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने यह कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों के वेतन से जुर्माने की राशि काटकर सरकारी खाते में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने तत्कालीन एसडीएम शिखा संखवार पर पांच हजार रुपये, जबकि श्याम नारायण शुक्ला और शालिनी उत्तम पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। जुर्माने की वसूली सुनिश्चित कराने के लिए आदेश की प्रति प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक), उत्तर प्रदेश शासन को भेजी गई है। साथ ही, वसूली की कार्रवाई के लिए आयोग के रजिस्ट्रार को भी आदेश की प्रति भेजी गई है।
दो साल तक नहीं मिली सूचना
दरअसल अपीलकर्ता सहदेव कुमार ने पांच मार्च 2024 को आरटीआई अधिनियम की धारा 6(1) के तहत सिकंदरा तहसील के उपजिलाधिकारी कार्यालय में पंजीकृत डाक से आवेदन भेजा था। इसमें तहसील में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों रामखिलावन और देशराज की प्रथम नियुक्ति, पदभार ग्रहण करने की तिथि, कार्यस्थल, स्थानांतरण संबंधी विवरण और राज्य कर्मचारी नियमावली के प्रावधानों से जुड़ी पांच बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी।
आरटीआई अधिनियम की धारा 7(1) के तहत सामान्यतः 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है। हालांकि, इस मामले में आवेदक को निर्धारित समयसीमा में जानकारी नहीं मिली। आयोग के मुताबिक, आवेदन देने के दो साल से अधिक समय बाद 10 अप्रैल 2026 को सूचना प्रेषित की गई।

आयोग के नोटिसों की भी की गई अनदेखी
पत्रावली की जांच के दौरान आयोग ने पाया कि वर्तमान एसडीएम प्रद्युम्न कुमार ने अपनी तैनाती के बाद आवेदक को संबंधित सूचनाएं उपलब्ध करा दी थीं। लेकिन उनसे पहले सिकंदरा तहसील में तैनात रहे तीन तत्कालीन एसडीएम ने अपने कार्यकाल में सूचना उपलब्ध नहीं कराई। आयोग के अनुसार, बार-बार नोटिस और कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुए।
मामले में आयोग ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली को नागरिकों के सूचना के अधिकार और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिहाज से गंभीर माना। इसी आधार पर आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत तीनों अधिकारियों पर अलग-अलग अर्थदंड लगाया गया।
वेतन से काटकर जमा होगी जुर्माने की राशि
राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने जुर्माने की राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से काटकर सरकारी खाते में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक), उत्तर प्रदेश शासन को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
आयोग की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश है कि आरटीआई के तहत निर्धारित समयसीमा में सूचना उपलब्ध कराना अधिकारियों की वैधानिक जिम्मेदारी है। आवेदन पर समय से कार्रवाई नहीं करना और आयोग के नोटिसों की अनदेखी करना संबंधित अधिकारियों के लिए दंडात्मक कार्रवाई का आधार बन सकता है।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
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