यूपी में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा एक्शन, फॉर्म-6, 7 और 8 की होगी जांच

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में गड़बड़ी और कथित अनियमितताओं के मामलों को लेकर चुनाव विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में 10 अप्रैल 2026 के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज किए गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की अनिवार्य जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
पीलीभीत में मतदाता सूची से जुड़े रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और आजमगढ़ में सामने आई अनियमितताओं के बाद प्रदेशभर में निगरानी बढ़ाई गई है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मतदाता सूची तैयार करने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तीनों तरह के फॉर्म की होगी जांच
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया 10 अप्रैल को समाप्त होने के बाद दर्ज किए गए आवेदनों की जांच में तीन प्रकार के फॉर्म शामिल होंगे।
फॉर्म-6: नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन।
फॉर्म-7: मतदाता सूची में दर्ज नाम को हटाने या किसी नाम के शामिल होने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए आवेदन।
फॉर्म-8: मतदाता सूची में नाम, पता या अन्य विवरण में संशोधन और मतदाता पहचान पत्र से संबंधित सुधार के लिए आवेदन।
इन फॉर्मों की जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि आवेदन नियमानुसार प्राप्त हुए थे या नहीं, संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं और नाम जोड़ने, हटाने अथवा संशोधन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की गई या नहीं।
कंप्यूटर सहायकों की फॉर्म फीडिंग पर रोक
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भौतिक रूप से प्राप्त आवेदनों को कंप्यूटर सहायकों के माध्यम से सिस्टम में दर्ज कराने पर रोक लगा दी है। अब ऐसे आवेदनों को बूथ लेवल अधिकारी (BLO) द्वारा BLO ऐप के माध्यम से डिजिटाइज किया जाएगा।
इसके साथ ही सभी भौतिक आवेदन सुरक्षित रखने और लंबित फॉर्मों की प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मतदाताओं के आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर निस्तारित हों।
गड़बड़ी मिलने पर अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी
CEO नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में अनियमितता मिलने पर केवल कंप्यूटर सहायकों तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) और कंप्यूटर सहायक की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) के स्तर पर निगरानी में लापरवाही मिलने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के प्रावधानों के प्रति भी सचेत किया गया है।
मंडलायुक्त करेंगे निगरानी, जिलों से मांगी गई रिपोर्ट
प्रदेश के मंडलायुक्तों को मतदाता सूची के कार्यों की निगरानी के लिए रोल ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें अपने मंडल के सभी जिलों में मतदाता सूची से संबंधित कामकाज पर नजर रखने और अनियमितताओं को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ में मतदाता सूची में डुप्लीकेट नामों से संबंधित शिकायतों पर समय से रिपोर्ट नहीं मिलने के मामले में संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। आगामी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) से पहले मतदाता सूची से दोहराए गए नामों को नियमानुसार हटाने पर भी जोर दिया गया है।
शिकायतों का 48 घंटे में निस्तारण करने के निर्देश
मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों के निस्तारण पर भी विशेष जोर दिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल, जन शिकायत प्रणाली, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जाए।
ECINET ऐप और मतदाता सेवा पोर्टल पर उपलब्ध 'बुक ए कॉल विद BLO' सुविधा के तहत आने वाले कॉल अनुरोध 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रहने चाहिए। BLO को मतदाताओं से संपर्क किए बिना उन्हें अनुपलब्ध चिह्नित नहीं करने की भी हिदायत दी गई है।
इसके अलावा अधिकारियों को अपने लॉगिन आईडी और पासवर्ड किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने तथा निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुसार पासवर्ड बदलने के निर्देश दिए गए हैं।
आगामी मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर रहेगा विशेष ध्यान
आगामी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की तैयारियों के बीच चुनाव विभाग का जोर मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने पर है। जांच के दौरान किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस कदम से प्रदेश में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया की निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। चुनाव विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
लेखक के बारे में
Syed Fiza Khatoon
सैयद फ़िज़ा खातून ‘विजुअल लाइव’ की तकनीकी एवं डिजिटल टीम की महत्वपूर्ण सदस्य हैं। वर्ष 2014 में स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद से उन्होंने मीडिया के तकनीकी और डिजिटल कार्यों में अपनी दक्षता विकसित की है। न्यूज के लेआउट और प्रस्तुतीकरण, कंटेंट के डिजिटल प्रसारण तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खबरों के अपडेट में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। खबर को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने से लेकर उसके डिजिटल वितरण तक वह जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करती हैं। सौम्य और मिलनसार स्वभाव के साथ नई तकनीकों और बदलते डिजिटल मीडिया को सीखने की निरंतर ललक उनकी कार्यशैली की खास पहचान है। टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और हर कार्य में कुछ नया सीखना उनकी पेशेवर सोच को दर्शाता है। डिजिटल पत्रकारिता के तेजी से बदलते दौर में तकनीकी समझ और रचनात्मक सोच के साथ सटीक, आकर्षक और प्रभावी न्यूज प्रस्तुतीकरण* में उनका योगदान ‘विजुअल लाइव’ की डिजिटल टीम को मजबूती प्रदान करता है। Syed Fiza Khatoon की सभी खबरें देखें →
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