Nepal Floods : मौतों का आंकड़ा 750 के पार, 3 हजार से ज्यादा लापता, फिर बाढ़ का अलर्ट

नेपाल/लखनऊ। नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ और सैलाब ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल सरकार के अनुसार, आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 633 हो गई है, जबकि 2500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा में 320 भारतीय नागरिकों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। वहीं बाढ़ में बहकर आए सात शव उत्तर प्रदेश में भी बरामद किए गए हैं।
ग्लेशियर टूटने के बाद चट्टानों, बर्फ, कीचड़ और मलबे के साथ आया विशाल सैलाब पहाड़ी नदियों के रास्ते तेजी से नीचे की ओर बढ़ा। इसकी चपेट में कई इमारतें, पुल, सड़कें और बिजली परियोजनाएं आ गईं। नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी इस आपदा ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है।

2500 से ज्यादा लोग अब भी लापता
बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। नेपाल के दक्षिणी चितवन जिले में अधिकारियों ने बाढ़ के दौरान मिले 229 अज्ञात और लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने का फैसला किया है।
बाढ़ का पानी कई इलाकों में उतर चुका है, लेकिन तबाही के निशान अभी भी साफ दिखाई दे रहे हैं। लोगों के घरों और सड़कों पर कीचड़ और मलबा जमा है। कई स्थानों पर घरों की दीवारों और गलियों में बाढ़ का मलबा फंसा हुआ है। राहतकर्मी प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और बचाव कार्य में जुटे हैं।
भारत के 320 नागरिक भी प्रभावित
नेपाल और तिब्बत में आई इस आपदा में 320 भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल से लौट रहे महाराष्ट्र के करीब एक सैकड़ा तीर्थयात्रियों के सीतामढ़ी पहुंचने पर बिहार सरकार ने उनकी सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की। यात्रियों को ट्रेन के जरिए उनके घरों के लिए रवाना कराया गया।
नेपाल में फंसे अन्य भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।
4 से 5 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण की जरूरत
नेपाल के वित्त मंत्री के मुताबिक, करीब तीन करोड़ की आबादी वाले हिमालयी देश को इस विनाशकारी बाढ़ के बाद सामान्य स्थिति में लौटने और पुनर्निर्माण के लिए लगभग 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ सकती है।
आपदा ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। सरकार के सामने प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं को दोबारा खड़ा करने की बड़ी चुनौती है।
हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ा असर
बाढ़ और सैलाब का असर नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ा है। त्रिशूली नदी पर स्थापित कई हाइड्रो पावर परियोजनाओं का संचालन प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 450 मेगावाट क्षमता वाली एक दर्जन से अधिक जलविद्युत परियोजनाओं पर इसका असर पड़ा है।
नेपाल के कुल बिजली उत्पादन के करीब एक चौथाई हिस्से के बाढ़ से प्रभावित होने की बात कही जा रही है। बिजली परियोजनाओं को हुए नुकसान से देश के ऊर्जा ढांचे पर भी दबाव बढ़ गया है।
घरों में घुसा कीचड़, सड़कों पर जमा मलबा
बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब प्रभावित इलाकों में तबाही का मंजर सामने आ रहा है। घरों के भीतर और बाहर कई फीट तक कीचड़ और मलबा जमा है। सड़कें और गलियां मलबे से पटी हुई हैं। लोगों के सामने अपने घरों और कारोबार को दोबारा खड़ा करने की चुनौती है।
नेपाल सरकार और राहत एजेंसियां प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी, चिकित्सा और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने में जुटी हैं। वहीं लापता लोगों की तलाश और बरामद शवों की पहचान का काम भी जारी है।
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