SIR प्रदर्शन में शामिल होने पर इमरान खान को हाईकोर्ट की फटकार, बिना शर्त माफी के बाद भी जारी रहेगी कानूनी सुनवाई

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान के SIR के विरोध में हुए प्रदर्शन में शामिल होने का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुंच गया है। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को हुई सुनवाई में अदालत ने उनकी नागरिकता और OCI कार्ड से जुड़ी शर्तों को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि अगर कोई भारतीय नागरिक अमेरिका में इस तरह के प्रदर्शन में हिस्सा लेता, तो उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाता? सुनवाई के दौरान इमरान खान की ओर से बिना शर्त माफी मांगी गई और भविष्य में ऐसे किसी प्रदर्शन में शामिल न होने का लिखित भरोसा भी दिया गया।
अमेरिका में भारतीय ऐसा करता तो क्या होता? कोर्ट ने OCI कार्ड का हवाला देकर पूछे सवाल
बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इमरान खान भारतीय नागरिक नहीं, बल्कि अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड है। अदालत ने टिप्पणी की कि OCI कार्डधारक भारतीय नागरिकों के समान अधिकारों का दावा नहीं कर सकते। पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि जब SIR का अभिनेता पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता, तो वे इस मुद्दे से जुड़े विरोध प्रदर्शन में क्यों शामिल हुए?
अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई भारतीय नागरिक अमेरिका में इसी तरह के प्रदर्शन में शामिल होता, तो उसे वापस भारत भेजने की कार्रवाई हो सकती थी। ये टिप्पणियां सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से की गईं।
मुंबई में प्रदर्शन के बाद जारी हुआ था Leave India Notice
यह विवाद 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आयोजित किया गया था। इस दौरान इमरान खान को पुलिस ने कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था।
इसके बाद फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) ने 14 अक्टूबर को उन्हें 'लीव इंडिया नोटिस' जारी किया। इसमें 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया गया था। नोटिस को चुनौती देते हुए अभिनेता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

अभिनेता ने मांगी बिना शर्त माफी
सुनवाई के दौरान इमरान खान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने अदालत को बताया कि अभिनेता ने बिना शर्त माफी मांगने और भविष्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेने का लिखित आश्वासन देने की बात कही है।
अदालत ने केवल आश्वासन को पर्याप्त नहीं माना और बिना शर्त माफी पर जोर दिया। पीठ ने अभिनेता की सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र करते हुए कहा कि एक सेलिब्रिटी के सार्वजनिक बयानों का उसके युवा प्रशंसकों पर प्रभाव पड़ सकता है। अदालत के अनुसार, पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद किए गए उनके कुछ पोस्ट दूसरों को प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने वाले हो सकते हैं।

इमरान के वकील ने रखी अपनी दलील
अभिनेता के वकील ने अदालत को बताया कि इमरान खान का जन्म अमेरिका में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय भारत में बिताया है। उनका भारत के फिल्म उद्योग से भी जुड़ाव रहा है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि अभिनेता का प्रदर्शन आयोजित करने वाले लोगों या संगठनों से कोई संबंध नहीं है और वे जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अभिनेता की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य उपलब्ध सामग्री का हवाला देते हुए प्रदर्शन में उनकी कथित भूमिका पर सवाल उठाए।
7 दिसंबर तक टली अगली सुनवाई, देश छोड़ने के नोटिस पर रोक बरकरार
सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने FRRO के लीव इंडिया नोटिस पर पहले से लगी रोक को 7 दिसंबर तक जारी रखा है। मामले की अगली सुनवाई भी इसी तारीख को होगी। इसका मतलब है कि फिलहाल इमरान खान को देश छोड़ने के नोटिस से राहत मिली हुई है। हालांकि, यह राहत अंतिम फैसला नहीं है और याचिका पर सुनवाई आगे जारी रहेगी।
यह मामला OCI कार्डधारकों के अधिकारों, विदेशी नागरिकों पर लागू नियमों और भारत में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में उनकी भागीदारी से जुड़े सवालों को सामने लाता है। अदालत की मौखिक टिप्पणियों और मामले के अंतिम कानूनी निर्णय को अलग-अलग समझना जरूरी है।
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