H1N1 को लेकर KGMU ने दूर किया डर, कहा- यह मौसमी फ्लू है, नए स्ट्रेन के कोई संकेत नहीं

लखनऊ। देश के विभिन्न हिस्सों में “स्वाइन फ्लू” यानी H1N1 को लेकर बढ़ती चिंता के बीच किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने आमजन को राहत देने वाली महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। KGMU ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में सामने आ रहे H1N1 संक्रमण को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। यह वायरस अब नियमित रूप से फैलने वाले मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस का हिस्सा है और वर्तमान निगरानी में किसी नए या असामान्य स्ट्रेन के सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है।
2009 की महामारी वाला वायरस अब मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा
KGMU के अनुसार “स्वाइन फ्लू” शब्द का इस्तेमाल सामान्यतः इन्फ्लुएंजा A(H1N1)pdm09 के लिए किया जाता है। वर्ष 2009 में महामारी का कारण बना यह वायरस अब मनुष्यों में नियमित रूप से प्रसारित होने वाले मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरसों में शामिल है। इसके साथ H3N2 और इन्फ्लुएंजा B भी मौसम के अनुसार प्रसारित होते रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति की H1N1 रिपोर्ट पॉजिटिव आने का मतलब यह नहीं है कि कोई नई महामारी शुरू हो गई है।
नए या ज्यादा घातक स्ट्रेन के नहीं मिले संकेत
KGMU ने बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR), ICMR और NCDC के साथ 25 अगस्त 2026 को देश में इन्फ्लुएंजा की स्थिति की समीक्षा की थी। निगरानी में सामने आया है कि भारत में वर्तमान में पाया जा रहा H1N1 वायरस पहले से ज्ञात मौसमी A(H1N1)pdm09 वंश से संबंधित है।
जीनोमिक और महामारी विज्ञान संबंधी निगरानी में फिलहाल कोई नया, असामान्य रूप से अधिक विषाणुजनक स्ट्रेन या असामान्य आनुवंशिक बदलाव नहीं मिला है। वायरस में होने वाले परिवर्तन सामान्य मौसमी antigenic drift के अनुरूप बताए गए हैं।
अधिकांश स्वस्थ लोगों में संक्रमण हल्का
KGMU के मुताबिक मौसमी अवधि में इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी सामान्य बात हो सकती है। अन्यथा स्वस्थ व्यक्तियों में अधिकांश संक्रमण हल्के होते हैं और समय के साथ ठीक हो जाते हैं। केवल H1N1 पॉजिटिव होने का अर्थ यह नहीं है कि मरीज गंभीर रूप से बीमार होगा या उसे अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ेगी।

इन लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह
छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। फेफड़े, हृदय, गुर्दे, यकृत या तंत्रिका तंत्र की पुरानी बीमारी, मधुमेह, अत्यधिक मोटापा, कैंसर या कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इन्फ्लुएंजा के गंभीर होने का जोखिम अधिक हो सकता है।
हर बुखार और खांसी में H1N1 जांच जरूरी नहीं
KGMU ने स्पष्ट किया है कि हर बुखार या खांसी वाले व्यक्ति को H1N1 की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। भारत सरकार और NCDC के दिशा-निर्देश मरीज की चिकित्सकीय स्थिति और बीमारी की गंभीरता के आधार पर जांच पर जोर देते हैं।
हल्के और बिना जटिलता वाले इन्फ्लुएंजा जैसे संक्रमण में आमतौर पर H1N1 जांच आवश्यक नहीं होती। गंभीर या जटिल मामलों में अथवा चिकित्सक की सलाह पर जांच कराई जा सकती है। अनावश्यक जांच से मरीजों में चिंता बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
RT-PCR है प्रमुख जांच
जहां प्रयोगशाला जांच आवश्यक हो, वहां रियल-टाइम RT-PCR को अनुशंसित आणविक जांच बताया गया है। आमतौर पर नाक और गले से स्वाब लेकर नमूना लिया जाता है। गंभीर निमोनिया के कुछ मामलों में निचले श्वसन तंत्र से नमूना लेने की जरूरत भी पड़ सकती है।
नमूना लक्षण शुरू होने के बाद जल्द से जल्द, प्राथमिक रूप से शुरुआती 48 घंटों के भीतर लिया जाना बेहतर माना जाता है। हालांकि गंभीर मरीज के उपचार में जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा के कारण देरी नहीं की जानी चाहिए।
इलाज उपलब्ध, खुद से दवा लेने से बचें
अधिकांश बिना जटिलता वाले मरीज आराम, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ और लक्षणों के अनुसार उपचार से ठीक हो जाते हैं। ओसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवाएं चिकित्सकीय सलाह के बाद ही लेने की सलाह दी गई है। गंभीर बीमारी या उच्च जोखिम वाले मरीजों में एंटीवायरल उपचार का विशेष महत्व हो सकता है।
वहीं, एंटीबायोटिक दवाएं इन्फ्लुएंजा वायरस पर प्रभावी नहीं होती हैं। इन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेना चाहिए और केवल संभावित बैक्टीरियल संक्रमण की स्थिति में डॉक्टर की सलाह पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
मास्क, हाथों की सफाई और वेंटिलेशन से बचाव
इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण होने पर जहां तक संभव हो घर पर रहने और बुजुर्गों तथा उच्च जोखिम वाले लोगों से निकट संपर्क से बचने की सलाह दी गई है। हाथों की नियमित सफाई, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना और जरूरत पड़ने पर उचित रूप से फिट होने वाला मास्क पहनना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।
बंद स्थानों में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना भी उपयोगी है। स्वस्थ लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के ओसेल्टामिविर या एंटीबायोटिक दवाएं बचाव के लिए लेने की जरूरत नहीं है।
उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए वैक्सीनेशन उपयोगी
KGMU ने बताया कि मौसमी इन्फ्लुएंजा का टीकाकरण विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनमें संक्रमण की जटिलताओं का जोखिम अधिक है और जिन्हें चिकित्सकीय रूप से टीकाकरण की सलाह दी गई है। इन्फ्लुएंजा वैक्सीन की संरचना समय-समय पर प्रसारित हो रहे वायरस के अनुसार बदली जाती है।
सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क
KGMU ने लोगों से अपील की है कि सांस लेने में कठिनाई, लगातार या बढ़ता हुआ बुखार, सीने में दर्द, होंठ या शरीर का नीला पड़ना, अत्यधिक सुस्ती, चेतना में बदलाव, पर्याप्त तरल न ले पाना, डिहाइड्रेशन, ऑक्सीजन स्तर कम होना या शुरुआती सुधार के बाद अचानक हालत बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
KGMU की अपील- जागरूक रहें, भयभीत नहीं
KGMU के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने आमजन से अपील की है कि H1N1 को लेकर अफवाहों और अनावश्यक डर से बचें। विभाग के अनुसार वर्तमान में H1N1 मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस के रूप में प्रसारित हो रहा है और निगरानी में कोई नया या असामान्य स्ट्रेन सामने नहीं आया है।
KGMU का संदेश साफ है- “जागरूक रहें, भयभीत नहीं।” लोगों को अनावश्यक जांच और खुद से दवा लेने से बचने के साथ गंभीर लक्षण या उच्च जोखिम की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की गई है।
लेखक के बारे में
Syed Fiza Khatoon
सैयद फ़िज़ा खातून ‘विजुअल लाइव’ की तकनीकी एवं डिजिटल टीम की महत्वपूर्ण सदस्य हैं। वर्ष 2014 में स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद से उन्होंने मीडिया के तकनीकी और डिजिटल कार्यों में अपनी दक्षता विकसित की है। न्यूज के लेआउट और प्रस्तुतीकरण, कंटेंट के डिजिटल प्रसारण तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खबरों के अपडेट में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। खबर को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने से लेकर उसके डिजिटल वितरण तक वह जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करती हैं। सौम्य और मिलनसार स्वभाव के साथ नई तकनीकों और बदलते डिजिटल मीडिया को सीखने की निरंतर ललक उनकी कार्यशैली की खास पहचान है। टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और हर कार्य में कुछ नया सीखना उनकी पेशेवर सोच को दर्शाता है। डिजिटल पत्रकारिता के तेजी से बदलते दौर में तकनीकी समझ और रचनात्मक सोच के साथ सटीक, आकर्षक और प्रभावी न्यूज प्रस्तुतीकरण* में उनका योगदान ‘विजुअल लाइव’ की डिजिटल टीम को मजबूती प्रदान करता है। Syed Fiza Khatoon की सभी खबरें देखें →
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