यूपी में खेतों से उगेगी बिजली और फसल, 2047 तक 150 GW नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य

एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस 2026 में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पेश किया उत्तर प्रदेश का स्वच्छ ऊर्जा विजन। वाराणसी के ICAR-IIVR में 100 किलोवाट क्षमता की पायलट परियोजना प्रस्तावित, किसानों को ‘अन्नदाता’ के साथ ‘ऊर्जादाता’ बनाने पर जोर।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार खेती और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को एक साथ बढ़ावा देने की दिशा में एग्रीवोल्टाइक मॉडल पर जोर दे रही है। इसके तहत खेतों में ऊंचाई पर सौर पैनल लगाकर उनके नीचे फसलों की खेती की जा सकेगी। प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने भारत मंडपम में आयोजित सातवें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस 2026 के ‘स्टेट मिनिस्टीरियल पिच’ सत्र में राज्य का नवीकरणीय ऊर्जा विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता के रूप में भी सशक्त बनाना है।
मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सौर ऊर्जा के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम जैसी योजनाएं ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा उत्पादन, किसान सशक्तीकरण और निवेश के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

एक खेत से फसल भी, बिजली भी
एके शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में करीब तीन करोड़ किसान खेती पर निर्भर हैं और 80 प्रतिशत से अधिक कृषि जोत एक हेक्टेयर से छोटी हैं। ऐसे में एग्रीवोल्टाइक मॉडल किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। इस तकनीक में सौर पैनलों के नीचे या उनके बीच उपयुक्त फसलों की खेती की जाती है, जिससे भूमि का दोहरा उपयोग संभव होता है।
इस मॉडल से खाद्य उत्पादन और बिजली उत्पादन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं हैं। प्रदेश ने 22 गीगावाट सौर क्षमता का लक्ष्य भी रखा है।
वाराणसी में 100 किलोवाट की पायलट परियोजना
मंत्री के अनुसार, एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से तकनीकी सहायता प्राप्त करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIVR) में 100 किलोवाट क्षमता की पायलट एग्रीवोल्टाइक परियोजना विकसित करने की तैयारी है।
विज्ञप्ति के मुताबिक, परियोजना की व्यवहार्यता अध्ययन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसे क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस परियोजना के जरिए खेती और सौर ऊर्जा के संयुक्त उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस मॉडल का विस्तार किया जा सके।
रूफटॉप सोलर और पीएम-कुसुम में यूपी की उपलब्धियां
राज्य सरकार के प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, पीएम सूर्य घर योजना के तहत उत्तर प्रदेश में करीब नौ लाख घरों में कुल 3,018 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है। सरकार का दावा है कि इस योजना में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है।
पीएम-कुसुम योजना के कंपोनेंट-C1 के तहत 8,896 कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है, जिनकी कुल क्षमता 76.2 मेगावाट बताई गई है। वहीं, कंपोनेंट-C2 के तहत 581 सब-स्टेशनों पर 1,708 मेगावाट क्षमता के लिए बिजली खरीद समझौते (PPA) किए गए हैं।
विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि प्रदेश में 3,098 मेगावाट क्षमता की यूटिलिटी-स्केल सौर परियोजनाएं चालू हैं, जबकि 6,295 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं क्रियान्वयन के अधीन हैं। इनमें 3,310 मेगावाट के सोलर पार्क भी शामिल हैं।
बायो-एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन पर भी जोर
बायो-एनर्जी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में 353 टन प्रतिदिन (TPD) की कुल क्षमता वाले 42 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों का उल्लेख किया गया है। सरकार का कहना है कि इस क्षेत्र में प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है।
ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में गोरखपुर और रामपुर के पायलट संयंत्रों से 31.5 किलोग्राम प्रति घंटे उत्पादन की जानकारी दी गई। इसके अलावा आईआईटी कानपुर, आईआईटी (बीएचयू) और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) के साथ इस क्षेत्र में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाने की बात कही गई है।
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की सौर ऊर्जा नीति-2022, बायो-एनर्जी नीति-2022 और ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के माध्यम से निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। घोषित प्रोत्साहनों में निजी डेवलपर्स के लिए 15,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से भूमि उपलब्ध कराने, 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट और सौर परियोजनाओं के लिए 10 वर्षों तक विद्युत शुल्क में छूट जैसे प्रावधान शामिल हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए परियोजना की श्रेणी के अनुसार पूंजीगत सब्सिडी तथा सीबीजी संयंत्रों के लिए 75 लाख रुपये प्रति टन प्रतिदिन क्षमता के हिसाब से सब्सिडी का भी उल्लेख किया गया है। इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े निवेश और परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
2047 तक 150 GW नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य
‘विकसित यूपी @2047’ के तहत राज्य ने वर्ष 2030 तक 32 गीगावाट और वर्ष 2047 तक 150 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। मंत्री ने पीएम-कुसुम 2.0 के तहत प्रस्तावित 10 गीगावाट एग्रीवोल्टाइक घटक में उत्तर प्रदेश की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने वैश्विक निवेशकों, परियोजना विकासकर्ताओं और विशेषज्ञों से प्रदेश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान में भागीदारी करने का आह्वान किया। सरकार का जोर है कि नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को गति देने में मदद मिले।
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