योगी सरकार का बड़ा फैसला: पशुपालकों को अनुदान, चार लिंक एक्सप्रेसवे तीन साल में बनाने का लक्ष्य

पशुपालन को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर; चार लिंक एक्सप्रेसवे पर खर्च होंगे 17,542 करोड़ रुपये
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में पशुपालन को प्रोत्साहन देने, किसानों की आय बढ़ाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने, जल परिवहन को व्यवस्थित बनाने तथा सड़क संपर्क मजबूत करने से जुड़े फैसले लिए गए। इनमें एक गाय पर 50 हजार रुपये के अनुदान का प्रावधान और चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण की योजना प्रमुख है।
पशुपालन को बढ़ावा, गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान
कैबिनेट के फैसलों में पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, पशुपालकों को एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान देने का प्रावधान है। इसके साथ ही पशु बीमा योजना में सरकार कुल प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी, जबकि शेष 15 प्रतिशत राशि किसान को देनी होगी।
सरकार का उद्देश्य उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देना, दूध उत्पादन में वृद्धि करना और पशुपालकों की आय के नए अवसर तैयार करना है। इसके लिए पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और पशु उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण पर सहमति
प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण पर सहमति दी गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 17,542 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इन्हें तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रस्तावित परियोजनाओं में शामिल हैं:
फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे: पैकेज-1 और पैकेज-2 की कुल लंबाई करीब 90 किलोमीटर।
आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक: दोनों एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने की योजना।
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे: पैकेज-1 और पैकेज-2 की कुल लंबाई करीब 106 किलोमीटर।
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे: लगभग 74 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे।
इन परियोजनाओं का निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर कराने की योजना है। निर्माण करने वाली कंपनियों को पांच साल तक एक्सप्रेसवे के रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
नाविकों और यात्रियों के लिए बीमा की व्यवस्था
प्रदेश में जल परिवहन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए नावों तथा जलयानों के पंजीकरण की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी गठित करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
नई व्यवस्था के तहत यांत्रिक और गैर-यांत्रिक नावों का पंजीकरण किया जाएगा। नावों की श्रेणी उनकी यात्री क्षमता के आधार पर निर्धारित होगी। साथ ही नाविकों और यात्रियों के बीमा का प्रावधान भी किया जाएगा। सरकार गंगा और यमुना सहित प्रदेश की 11 नदियों पर जल परिवहन की संभावनाओं को विकसित करना चाहती है।
48 हजार से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज
कैबिनेट ने अशासकीय सहायता प्राप्त, वित्तविहीन और सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे कुल 48,062 कर्मचारियों को लाभ मिलने का अनुमान है।
प्रस्ताव के मुताबिक, प्रत्येक कर्मचारी के बीमा प्रीमियम के लिए सरकार 3,000 रुपये देगी। इस पर कुल 14.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की कैशलेस सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा बेसिक शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न श्रेणियों के 1,22,305 कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है।

सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार का रास्ता साफ
कैबिनेट ने सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार के लिए ग्रामीण क्षेत्र में निशुल्क जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह स्कूल 22 जुलाई 2019 से संचालित है। जमीन उपलब्ध होने से विद्यालय के विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर पर स्टांप ड्यूटी का प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश में कंपनियों के विलय और विभाजन की प्रक्रिया को स्पष्ट बनाने के लिए स्टांप ड्यूटी से संबंधित प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव के तहत शेयर वैल्यू पर 0.50 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी और संपत्ति शामिल होने की स्थिति में उस पर दो प्रतिशत स्टांप ड्यूटी का प्रावधान है।
इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसका उद्देश्य कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर से जुड़ी प्रक्रियाओं में स्पष्टता लाना है।
विकास और जनकल्याण से जुड़े फैसलों पर जोर
कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों में पशुपालन, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को प्रमुखता दी गई। चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से जहां सड़क संपर्क बेहतर बनाने की योजना है, वहीं पशुपालकों के लिए अनुदान और बीमा संबंधी प्रावधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने के उद्देश्य से किए गए हैं।
लेखक के बारे में
Syed Fiza Khatoon
सैयद फ़िज़ा खातून ‘विजुअल लाइव’ की तकनीकी एवं डिजिटल टीम की महत्वपूर्ण सदस्य हैं। वर्ष 2014 में स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद से उन्होंने मीडिया के तकनीकी और डिजिटल कार्यों में अपनी दक्षता विकसित की है। न्यूज के लेआउट और प्रस्तुतीकरण, कंटेंट के डिजिटल प्रसारण तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खबरों के अपडेट में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। खबर को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने से लेकर उसके डिजिटल वितरण तक वह जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करती हैं। सौम्य और मिलनसार स्वभाव के साथ नई तकनीकों और बदलते डिजिटल मीडिया को सीखने की निरंतर ललक उनकी कार्यशैली की खास पहचान है। टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और हर कार्य में कुछ नया सीखना उनकी पेशेवर सोच को दर्शाता है। डिजिटल पत्रकारिता के तेजी से बदलते दौर में तकनीकी समझ और रचनात्मक सोच के साथ सटीक, आकर्षक और प्रभावी न्यूज प्रस्तुतीकरण* में उनका योगदान ‘विजुअल लाइव’ की डिजिटल टीम को मजबूती प्रदान करता है। Syed Fiza Khatoon की सभी खबरें देखें →
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