लखनऊ में 26-27 अक्टूबर को होगा ‘श्रम संवाद’, श्रम सुधारों और सामाजिक सुरक्षा पर जुटेंगे विशेषज्ञ

चार श्रम संहिताओं के अनुपालन, गिग व असंगठित श्रमिकों के कल्याण और रोजगार योजनाओं पर होगा मंथन
बाल श्रम उन्मूलन, ईपीएफओ-ईएसआईसी की योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए श्रमिकों को सुविधाएं पहुंचाने पर भी होगी चर्चा
लखनऊ। श्रम संहिताओं, श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए राजधानी लखनऊ में 26 और 27 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय राज्य स्तरीय ‘श्रम संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। भारत सरकार का श्रम एवं रोजगार मंत्रालय उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन करेगा। इसका उद्देश्य श्रम सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन, श्रम कानूनों के अनुपालन और श्रमिकों को उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
यह कार्यक्रम देशभर में चल रही ‘श्रम संवाद’ पहल का हिस्सा है। इस अभियान की शुरुआत 28 सितंबर 2026 को की गई थी। इसके तहत 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 316 जिलों में 90 दिनों तक जिला स्तरीय जनसंपर्क और जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान में औद्योगिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि नियोक्ताओं और अन्य संबंधित पक्षों को नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों, उनके दायरे और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी मिल सके।
श्रम सुधारों और श्रमिक कल्याण पर पहले दिन चर्चा
कार्यक्रम के पहले दिन श्रम सुधारों पर विचार-विमर्श होगा। इसमें श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव मुख्य भाषण देंगे। दिन के शुरुआती सत्रों में अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों तथा भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों (बीओसीडब्ल्यू) के कल्याण से जुड़ी पहलों पर चर्चा की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्री भी कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे। इसके अलावा कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की योजनाओं एवं सेवाओं से संबंधित जानकारी साझा की जाएगी।
सत्रों में ई-श्रम, श्रम सुविधा पोर्टल, समाधान और लेबर स्टैक जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रमिकों तक कल्याणकारी सुविधाएं पहुंचाने पर भी जोर रहेगा। साथ ही उत्तर प्रदेश में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं और श्रम सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

चार श्रम संहिताओं के अनुपालन पर होगा मंथन
कार्यक्रम के दूसरे दिन का मुख्य विषय ‘श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन और आगे की राह’ होगा। इसकी शुरुआत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की अध्यक्षता में तकनीकी सत्रों से होगी। इनमें चारों श्रम संहिताओं के तहत वैधानिक प्रावधानों और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।
इनमें मजदूरी संहिता, 2019; औद्योगिक संबंध संहिता, 2020; सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020; तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020 शामिल हैं। इन संहिताओं के प्रावधानों को समझने और उनके क्रियान्वयन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
इसके अलावा प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना सहित प्रमुख योजनाओं पर विशेष प्रस्तुतियां होंगी। बाल श्रम की रोकथाम, बच्चों के बचाव एवं पुनर्वास, जिला स्तरीय निगरानी व्यवस्था तथा बाल और बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन की रणनीतियों पर भी चर्चा की जाएगी।
उद्योग जगत की समस्याओं और सवालों पर भी होगा संवाद
दोनों दिन आयोजित होने वाले खुले चर्चा सत्र कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। इन सत्रों में प्रतिभागियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को श्रम कानूनों के अनुपालन, नियामकीय प्रक्रियाओं और जमीनी स्तर पर सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को उठाने का अवसर मिलेगा। इनके माध्यम से संबंधित सवालों के समाधान और श्रम सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संवाद को बढ़ावा दिया जाएगा।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारी भी भाग लेंगे। उम्मीद है कि इस पहल के माध्यम से नियोक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों के बीच श्रम संहिताओं को लेकर स्पष्टता बढ़ाने तथा श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रति जागरूकता मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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