चेतगंज की 140वीं नक्कटैया में दिखेगा एयर शो का नजारा, 100 से अधिक लाग-विमान बनेंगे आकर्षण

वाराणसी। चेतगंज नक्कटैया केवल एक धार्मिक आयोजन या मेला नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक चेतना और जनभागीदारी की एक ऐतिहासिक परंपरा है। इसकी शुरुआत 19वीं सदी के अंतिम दौर में मानी जाती है। समय के साथ यह आयोजन रामायण की लीला से आगे बढ़कर सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करने और देशभक्ति का संदेश देने का माध्यम भी बना।
इस बार खास आकर्षणों के साथ आयोजित होगी चेतगंज नक्कटैया। 29 अक्टूबर को होने वाले 140वें आयोजन में 100 से अधिक लाग-विमान लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे। इस बार की थीम में वाराणसी में हाल ही में हुए भारतीय वायुसेना के एयर शो की झलक भी देखने को मिलेगी।
1888 से चली आ रही है नक्कटैया की परंपरा
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, चेतगंज की नक्कटैया को वर्ष 1888 में बाबा फतेहराम ने भव्य रूप देना शुरू किया था। उस दौर में देश अंग्रेजी शासन के अधीन था। नक्कटैया के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप के माध्यम से लोगों तक सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े संदेश पहुंचाए जाने लगे और राष्ट्रीय और समसामयिक विषयों पर आधारित लाग-विमान भी शामिल किए जाते रहे हैं। कुछ स्रोत इसकी शुरुआत 1887 बताते हैं, जबकि कई ऐतिहासिक विवरण 1888 का उल्लेख करते हैं।

क्या है नक्कटैया का धार्मिक महत्व?
नक्कटैया की कथा रामायण के उस प्रसंग पर आधारित है, जिसमें रावण की बहन शूर्पणखा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के पास पहुंचती है। प्रसंग के अनुसार, लक्ष्मण शूर्पणखा की नाक काट देते हैं। इसके बाद शूर्पणखा अपने अपमान का बदला लेने के लिए खर-दूषण और राक्षसी सेना को युद्ध के लिए उकसाती है।
इसी प्रसंग को रामलीला के माध्यम से जीवंत किया जाता है। जुलूस में विभिन्न प्रकार के लाग-विमान, स्वांग और झांकियां शामिल होती हैं। ये आयोजन को धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोककला और नाटकीय प्रस्तुति का रूप देते हैं।
अंग्रेजी शासन के दौर में बना जनजागरण का माध्यम
चेतगंज की नक्कटैया के इतिहास का एक महत्वपूर्ण पक्ष इसकी सामाजिक और राष्ट्रीय भूमिका भी है। ऐतिहासिक लेखों में उल्लेख मिलता है कि अंग्रेजी शासन के समय इस आयोजन के जरिए लोगों तक आजादी और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े संदेश पहुंचाए जाते थे।
रामलीला के प्रसंगों और झांकियों के माध्यम से अंग्रेजी शासन के अत्याचार, पुलिस दमन और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विषयों को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता था। धार्मिक आयोजन होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रहती थी, जिससे संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचता था।
लाखों की भीड़ जुटाने वाला काशी का लक्खा मेला
चेतगंज की नक्कटैया को काशी के प्रमुख लक्खा मेलों में गिना जाता है। करवा चौथ की रात आयोजित होने वाले इस मेले में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और आसपास के क्षेत्रों से आए लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। सड़कों और गलियों में सजावट, झांकियां और रातभर चलने वाला जुलूस इसकी खास पहचान हैं।
140वें आयोजन में एयर शो की झलक
इस बार नक्कटैया में एयर शो से प्रेरित लाग-विमान खास आकर्षण रहने की उम्मीद है। वाराणसी के नमो घाट पर हाल ही में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और स्वदेशी तेजस सहित कई विमानों ने हवाई प्रदर्शन किया था। नक्कटैया में इस आयोजन से प्रेरित झांकियों के जरिए लोगों को आधुनिक विमानन और देश की सैन्य क्षमता की झलक देखने को मिल सकती है।
कई जिलों से पहुंचेंगे लाग-विमान
आयोजकों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस बार 100 से अधिक लाग-विमान नक्कटैया में शामिल होंगे। प्रयागराज, मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही, ज्ञानपुर, जक्खिनी, आजमगढ़ और फूलपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से लाग-विमानों के पहुंचने की जानकारी दी गई है।
इन झांकियों में धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों के साथ सामाजिक सरोकारों तथा देशभक्ति से जुड़े संदेश भी देखने को मिलेंगे। नक्कटैया का जुलूस हर साल बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है और काशी की लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखता है।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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