गोरखपुर से यूपी भाजपा की नई सियासी तस्वीर! कमलेश पासवान से मुलाकात ने दलित नेतृत्व पर बढ़ाई चर्चा

गोरखपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का गोरखपुर दौरा कई राजनीतिक संकेत छोड़ गया है। इस दौरे में पार्टी नेतृत्व ने पूर्वांचल के सहयोगी दलों और विभिन्न सामाजिक वर्गों से जुड़े नेताओं के साथ मुलाकात की। इसी क्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री और बांसगांव से सांसद कमलेश पासवान के आवास पर नितिन नवीन का पहुंचना चर्चा का विषय बन गया है। इसके बाद प्रदेश भाजपा में दलित नेतृत्व और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं।
हालांकि, भाजपा की ओर से कमलेश पासवान को किसी नई संगठनात्मक या राजनीतिक जिम्मेदारी दिए जाने की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में उन्हें प्रदेश में पार्टी का अगला बड़ा दलित चेहरा बनाए जाने की चर्चा को फिलहाल राजनीतिक कयास के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
कमलेश पासवान के घर चाय पर मुलाकात, परिवार से भी मिले नितिन नवीन
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने 5 नवंबर को गोरखपुर में केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान के आवास पर पहुंचकर उनसे और उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। इससे पहले उनके दौरे में पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी शामिल थीं।
गौर करने वाली बात यह है कि नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के गोरखपुर स्थित आवास पर रात्रिभोज किया था। इस दौरान उत्तर प्रदेश भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े समेत अन्य नेता भी मौजूद थे। यानी दोनों मुलाकातें अलग-अलग अवसरों पर हुई थीं।

लगातार चार बार सांसद बनने का रिकॉर्ड
कमलेश पासवान पूर्वांचल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह गोरखपुर जिले की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित बांसगांव लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्ष 2002 से 2007 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। इसके बाद 2009 में पहली बार लोकसभा पहुंचे और 2014, 2019 तथा 2024 में भी जीत दर्ज की।
इस तरह वह बांसगांव से लगातार चौथी बार सांसद चुने गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में 9 जून 2024 को उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
पासी समाज से आते हैं कमलेश पासवान
कमलेश पासवान पासी समुदाय से आते हैं। उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए उनकी सामाजिक पहचान और पूर्वांचल में राजनीतिक सक्रियता को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की उनसे मुलाकात को इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
भाजपा अध्यक्ष के गोरखपुर दौरे में केवल कमलेश पासवान ही नहीं, बल्कि निषाद पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद से भी मुलाकात शामिल रही। इससे साफ है कि दौरे के दौरान पार्टी नेतृत्व ने पूर्वांचल के अलग-अलग सामाजिक समूहों और सहयोगी दलों के नेताओं से संपर्क साधा।
2027 के चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की कवायद
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा संगठन को मजबूत करने के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व पर भी ध्यान दे रही है। गोरखपुर में नितिन नवीन की बैठकों, सहयोगी दलों के नेताओं से मुलाकात और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद को इसी रणनीतिक गतिविधि का हिस्सा माना जा रहा है।
ऐसे में कमलेश पासवान के आवास पर राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी ने उनके राजनीतिक महत्व को लेकर चर्चाएं जरूर बढ़ाई हैं। लेकिन क्या उन्हें प्रदेश में दलित नेतृत्व का बड़ा चेहरा बनाया जाएगा या संगठन में कोई नई भूमिका मिलेगी, इस पर अभी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
फिलहाल गोरखपुर से सामने आई राजनीतिक गतिविधियां यह जरूर बताती हैं कि 2027 के चुनाव से पहले भाजपा पूर्वांचल में संगठन और सामाजिक संपर्क को मजबूत करने में जुटी है। कमलेश पासवान की आगे की भूमिका पर अब राजनीतिक नजरें रहेंगी।
लेखक के बारे में
शैलेन्द्र कुमार सिंह
पिछले करीब आठ वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। फोटो जर्नलिस्ट के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले शैलेन्द्र ने स्टेट मीडिया, दैनिक भास्कर सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म और अपने डिजिटल पोर्टल ‘शब्द भेदी’ के माध्यम से पत्रकारिता को आगे बढ़ाया। जमीनी मुद्दों, स्थानीय खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाना उनकी पत्रकारिता की खास पहचान है। अनुभव, संघर्ष और निरंतर सीखने के साथ उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। शैलेन्द्र कुमार सिंह की सभी खबरें देखें →
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