घर से दूर जवानों के बीच पहुंचे राजनाथ, मिठाई और ‘बड़ा खाना’ के साथ मनाई दीपावली

सिलीगुड़ी। त्योहार की रौनक तब और खास हो जाती है, जब अपनों से दूर देश की सीमाओं की रखवाली कर रहे जवानों के बीच खुशियां बांटी जाएं। दीपावली से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी पहुंचे और सैनिकों के साथ त्योहार मनाया। कहीं मिठाइयां बांटी गईं तो कहीं पारंपरिक ‘बड़ा खाना’ के दौरान जवानों के साथ बैठकर भोजन किया गया। इस मुलाकात ने सेना की उस भावना को सामने रखा, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों और संस्कृतियों से आए सैनिक एक परिवार की तरह साथ रहते हैं।
सुकना में जवानों के साथ ‘बड़ा खाना’, बोले- परिवार के बीच आया हूं
राजनाथ सिंह ने सिलीगुड़ी स्थित सुकना मिलिट्री स्टेशन पर भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर यानी 33वीं कोर के जवानों के साथ दीपावली मनाई। इस दौरान उन्होंने सैनिकों के साथ पारंपरिक ‘बड़ा खाना’ में हिस्सा लिया और उनके साथ रात्रिभोज किया।
जवानों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वह यहां किसी औपचारिक सरकारी कार्यक्रम के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के बीच दीपावली की खुशियां बांटने आए हैं। उन्होंने देश की सीमाओं की सुरक्षा में जुटे सैनिकों के त्याग और समर्पण की सराहना की। साथ ही भरोसा दिलाया कि सरकार जवानों के परिवारों के कल्याण, सुरक्षा और सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

बागडोगरा में वायुसेना के जवानों को खिलाई मिठाई
रक्षा मंत्री ने बागडोगरा एयरफील्ड पर भारतीय वायुसेना के जवानों से भी मुलाकात की। उन्होंने सैनिकों से बातचीत की और कई जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान एक वायुसेना कर्मी ने देशभक्ति गीत भी सुनाया।
राजनाथ सिंह ने वायुसेना के जवानों के साहस, अनुशासन और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के साथ प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्यों में भी वायुसेना के जवान अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने तकनीक के बदलते दौर में सेना को और सक्षम बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
‘पूर्वोत्तर देश का आखिरी नहीं, पहला सिरा’
सुकना में अपने संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर भारत को लेकर अहम बात कही। उन्होंने कहा कि वह इस क्षेत्र को देश का आखिरी सिरा नहीं, बल्कि पहला सिरा मानते हैं। उनके मुताबिक, पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता, जैव विविधता और भौगोलिक स्थिति देश की पहचान और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सैनिकों को आगाह किया कि अब युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। दुश्मन केवल सीमा पर आमने-सामने की लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्रोन, साइबर हमलों और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के जरिए भी चुनौती पेश कर सकता है। ऐसे में सेना को तकनीकी रूप से मजबूत और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा।
जवानों का मनोबल ही सबसे बड़ी ताकत
रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिकों के लिए अनुशासन और साहस बेहद जरूरी हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जवानों का मनोबल तब मजबूत होता है, जब उन्हें भरोसा होता है कि पूरा देश और देश का नेतृत्व उनके साथ खड़ा है।
उन्होंने त्योहारों पर घर-परिवार से दूर रहने वाले सैनिकों की भावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जवानों का यही समर्पण देशवासियों को सुरक्षित माहौल में त्योहार मनाने का अवसर देता है।

अग्निवीरों के लिए दो साल के अतिरिक्त सेवा अवसर का भी जिक्र
इस दौरे के दौरान राजनाथ सिंह ने अग्निपथ योजना के तहत शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी इच्छा और निर्धारित शर्तों के आधार पर दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर देने के फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे अग्निवीरों के लिए दीपावली का बड़ा उपहार बताया। पात्रता और चयन मानदंड पूरे करने वाले अग्निवीरों के नियमित सैन्य कैडर में शामिल होने की संभावना भी इस व्यवस्था से जुड़ी है।
दीपावली पर शहीदों को नमन करने पहुंचेंगे सिक्किम
रक्षा मंत्री का कार्यक्रम यहीं समाप्त नहीं होगा। 8 नवंबर को दीपावली के दिन वह सिक्किम स्थित शेराथांग युद्ध स्मारक पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद वह सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात जवानों से मुलाकात और बातचीत भी करेंगे।
राजनाथ सिंह का यह दौरा त्योहार के मौके पर सैनिकों के साथ सरकार की एकजुटता और उनके योगदान के प्रति सम्मान का संदेश देता है। सुकना का ‘बड़ा खाना’ और बागडोगरा में मिठाइयों का आदान-प्रदान इस बात की याद दिलाता है कि वर्दी के पीछे अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों से आए जवानों का एक साझा परिवार है—जिसकी सबसे बड़ी पहचान देशसेवा है।
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