भारत में दखल के शक में विदेशी फंडिंग की पड़ताल, ED के रडार पर 15 लाख डॉलर के संदिग्ध लेन-देन

नई दिल्ली। भारत के घरेलू मामलों को प्रभावित करने के कथित प्रयास और संदिग्ध विदेशी फंडिंग को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी दो विदेशी संस्थाओं से जुड़े वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है। मामला एक ब्रिटेन स्थित कंपनी के खाते में पहुंचे 10 लाख डॉलर और उसी कंपनी को कनाडा की एक अन्य संस्था से मिले 5 लाख डॉलर के कथित ट्रांसफर से जुड़ा है। दोनों लेन-देन की कुल रकम करीब 15 लाख डॉलर बताई जा रही है। भारतीय मुद्रा में यह राशि विनिमय दर के अनुसार लगभग 13 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ED यह पता लगाने में जुटी है कि रकम का वास्तविक स्रोत क्या था, किन रास्तों से इसे अलग-अलग देशों में भेजा गया और भारत में किन संस्थाओं या व्यक्तियों तक इसका लाभ पहुंचा। जांच में जर्मनी, दुबई, लिथुआनिया, कनाडा, सेंट किट्स एंड नेविस और ब्रिटेन के बीच बने कथित वित्तीय नेटवर्क की जानकारी सामने आई है।
जर्मनी के ट्रस्ट से शुरू हुई 10 लाख डॉलर की कथित फंडिंग
रिपोर्ट के अनुसार, ED की जांच में जर्मनी के Dr Matthias Karl Vogt Trust को 10 लाख डॉलर की रकम का वास्तविक स्रोत बताया गया है। आरोप है कि इस रकम को सीधे भारत भेजने के बजाय पहले लिथुआनिया की कंपनी XBase Digital UAB के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। इसके बाद अलग-अलग वित्तीय माध्यमों और संस्थाओं के जरिए पैसा ब्रिटेन स्थित एक कंपनी तक पहुंचा।
जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जर्मन ट्रस्ट की ओर से डॉ. मैथियास वोग्ट का एक पत्र भी सामने आया, जिसमें भुगतान डिजिटल करेंसी के माध्यम से किए जाने की बात कही गई थी। एजेंसी को संदेह है कि इस डिजिटल संपत्ति का संबंध हवाला के जरिए दुबई पहुंची रकम से हो सकता है। इस पहलू की भी जांच की जा रही है।

सेंट किट्स एंड नेविस की कंपनी के जरिए भारत पहुंची रकम
जांच में TCC Digital Markets Ltd नाम की कंपनी का भी उल्लेख है, जो कैरेबियाई देश सेंट किट्स एंड नेविस में पंजीकृत बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ED को संदेह है कि इस कंपनी के जरिए रकम को अनुदान यानी 'ग्रांट' के रूप में ब्रिटेन स्थित कंपनी तक पहुंचाया गया।
बताया गया है कि ब्रिटेन की कंपनी के Airwallex (UK) Ltd खाते में फरवरी और मार्च 2026 के बीच 10 लाख डॉलर प्राप्त हुए। इसके बाद सेंट किट्स एंड नेविस में पंजीकृत कंपनी की ओर से दो किस्तों में 67,006 और 71,746 ब्रिटिश पाउंड ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी इस पूरे लेन-देन की कड़ियों और भारत में अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है।
कनाडा की कंपनी से भी पहुंचे 5 लाख डॉलर
ED की पड़ताल में एक दूसरा संदिग्ध ट्रांजैक्शन भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में पंजीकृत ZBase Digital Inc नाम की कंपनी ने फरवरी 2026 में उसी ब्रिटेन स्थित कंपनी के Airwallex खाते में 5 लाख डॉलर भेजे थे।
इस रकम के स्रोत, भुगतान के उद्देश्य और भारत में इसके इस्तेमाल की जांच की जा रही है। बताया गया है कि भारतीय एजेंसियां इस लेन-देन से संबंधित जानकारी की पुष्टि Airwallex से भी कर रही हैं। यदि दोनों ट्रांजैक्शन की पुष्टि होती है तो इनकी संयुक्त रकम 15 लाख डॉलर होगी।
कई देशों के रास्ते रकम भेजने पर एजेंसी की नजर
इस मामले में जांच का एक प्रमुख पहलू यह है कि रकम कथित तौर पर कई देशों और संस्थाओं से होकर गुजरी। ED यह समझने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग कंपनियों और खातों के इस्तेमाल के पीछे सामान्य कारोबारी प्रक्रिया थी या वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों को छिपाने की कोशिश की गई।
जांच एजेंसी के सामने यह सवाल भी है कि भारत में पहुंची रकम का इस्तेमाल किस काम के लिए किया गया और क्या इसका संबंध देश के घरेलू मामलों को प्रभावित करने की किसी गतिविधि से था। फिलहाल इन आशंकाओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
विदेशी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर ED की नजर
ED के अधिकार क्षेत्र में मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानूनों के संभावित उल्लंघनों की जांच शामिल है। एजेंसी धन के स्रोत, लेन-देन की प्रकृति और अपराध से अर्जित संपत्ति से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर सकती है। हालांकि, इस मामले में आगे कौन-सी कानूनी कार्रवाई होगी, यह जांच में सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित कानूनों के तहत स्थापित आधार पर निर्भर करेगा।
फिलहाल 10 लाख डॉलर के कथित ट्रांसफर के साथ 5 लाख डॉलर के दूसरे लेन-देन की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन पैसों का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ और भारत में इसके अंतिम लाभार्थी कौन हैं। जांच पूरी होने के बाद ही कथित विदेशी फंडिंग और घरेलू मामलों में दखल के आरोपों की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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