एक वक्त में कर रहा था 2 नौकरियां, झारखंड परीक्षा घोटाले के मास्टरमाइंड अभय तिवारी को लेकर एक और बड़ा खुलासा

अभय तिवारी अलग-अलग नाम से एक ही वक्त में दो नौकरी कर रहा था। वो गोड्डा में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर था। यहां वो अभय तिवारी के नाम से नौकरी कर रहा था। उसकी दूसरी नौकरी TDPL कंपनी में थी।
ऐसे चल रहा था 'डबल जॉब' का खेल
एक तरफ अभय तिवारी गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर अपनी असली पहचान यानी 'अभय तिवारी' के नाम से नौकरी कर रहा था। दूसरी तरफ, वही शख्स टीडीपीएल (TDPL) कंपनी में 'मनोज तिवारी' के नाम से मार्केटिंग मैनेजर की नौकरी संभाल रहा था।
गौर करने वाली बात यह है कि एक ही व्यक्ति कागजों और प्रशासनिक व्यवस्था को चकमा देकर एक ही वक्त में दो अलग-अलग स्थानों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा था और दोनों जगह से वेतन व लाभ ले रहा था।
खुद परीक्षा देता था और बन जाता था 'टॉपर'
अभय तिवारी सिर्फ दो नौकरियां करने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह झारखंड के परीक्षा तंत्र का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन चुका था। पिछले 13 वर्षों में झारखंड में जितनी भी सरकारी परीक्षाएं हुईं, अभय तिवारी हर परीक्षा में बैठा और लगभग सभी में उसने टॉप किया या पहली-दूसरी रैंक हासिल की।
उसने इंडियन नेवी (SSR) से लेकर भाभा एटॉमिक सेंटर (असिस्टेंट), नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड, सीआरपीएफ हेड कांस्टेबल, जेएसएससी पुलिस सब-इस्पेक्टर, जेएसएससी पीजीटी, और जेपीएससी (ACF, FRO, FSO) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं एक ही प्रयास में क्रैक कर डालीं। सीआईडी के अनुसार, अभय तिवारी ने 13 साल में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं।
वह इन परीक्षाओं में इसलिए बैठता था और टॉप करता था, ताकि वह कोचिंग सेंटरों और अभ्यर्थियों को अपना रिजल्ट दिखाकर यह साबित कर सके कि पूरा परीक्षा तंत्र और सिस्टम उसकी मुट्ठी में है। इसी धौंस के दम पर वह नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये का अवैध धंधा चला रहा था।
उसने JPSC का प्री एग्जाम क्लीयर कराने का रेट पांच लाख रुपये रखा गया था। मेन्स क्लीयर कराने का रेट 25 लाख रुपये था। अभय तिवारी 10 लाख रुपये एडवांस लेता था। एडवांस मिलने के बाद सलेक्शन की गारंटी दी जाती थी।
परिवार और रिश्तेदारों को भी कराया सेट
अभय तिवारी ने अपनी इस दक्षता का फायदा केवल खुद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने पूरे नेटवर्क का दायरा बढ़ाते हुए अपने भाई, भाभी और साली को भी कायदे से सरकारी नौकरियों में सेट करवा दिया। कोई भी पिछले दरवाजे से नहीं आया, बल्कि सिस्टम की मिलीभगत से पूरे षड्यंत्र के तहत सबको एग्जाम पास करवा कर नियुक्ति पत्र दिलाए गए।
लेखक के बारे में
Santosh Kumar Singh
श्री सिंह ‘विजुअल लाइव’ मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल के संपादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2004 से उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी सेवाएं देते हुए पत्रकारिता का लंबा अनुभव अर्जित किया है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय स्वरूप और भारत प्रतिदिन सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए उन्होंने रिपोर्टिंग की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लखनऊ आगमन से लेकर राजनीति, प्रशासन, जनसरोकार और शहर की महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। श्री सिंह की विशेष रुचि खोजी पत्रकारिता और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल में है। इंटरनेट आधारित शोध, सूचना के स्रोतों की पड़ताल और खबर की बारीकियों तक पहुंचने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। बदलते मीडिया परिदृश्य में वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं। पत्रकारिता के साथ उन्हें संगीत और यात्रा में विशेष रुचि है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए जिज्ञासा, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और तथ्यों के प्रति ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। Santosh Kumar Singh की सभी खबरें देखें →
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