साहित्य नोबेल 2026 का आज ऐलान, कैन श्वे सबसे आगे; अमिताव घोष का नाम भी चर्चा में

नई दिल्ली। साहित्य की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल नोबेल पुरस्कार 2026 के साहित्य विजेता के नाम की घोषणा आज की जाएगी। स्वीडिश अकादमी भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे विजेता के नाम का ऐलान करेगी। घोषणा से पहले बुकमेकरों के अनुमानों में चीन की प्रयोगधर्मी लेखिका कैन श्वे को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। भारत की ओर से लेखक अमिताव घोष का नाम भी संभावित विजेताओं में चर्चा में है।
हालांकि, स्वीडिश अकादमी संभावित विजेताओं की आधिकारिक सूची या शॉर्टलिस्ट सार्वजनिक नहीं करती। इसलिए कैन श्वे या किसी अन्य लेखक के दावेदार होने की जानकारी को आधिकारिक नामांकन सूची नहीं माना जा सकता।
कैन श्वे का लेखन क्यों है खास?

73 वर्षीय चीनी लेखिका कैन श्वे का वास्तविक नाम डेंग शियाओहुआ है। उनका लेखन पारंपरिक कहानी कहने के तरीके से काफी अलग माना जाता है। उनकी रचनाओं में सपने जैसे दृश्य, असामान्य परिस्थितियां और पात्रों के भीतर चलने वाले विचार प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
उनकी लेखन शैली की तुलना कई बार फ्रांज काफ्का और जॉर्ज लुइस बोर्खेस जैसे प्रसिद्ध लेखकों से की गई है। द लास्ट लवर, लव इन द न्यू मिलेनियम और आई लिव इन द स्लम्स उनकी चर्चित कृतियों में शामिल हैं।
अमिताव घोष भी संभावित नामों में
भारतीय लेखक अमिताव घोष का नाम भी इस बार साहित्य नोबेल की संभावित सूची में चर्चा में है। उनकी चर्चित पुस्तक सी ऑफ पॉपीज वर्ष 2008 में मैन बुकर पुरस्कार की शॉर्टलिस्ट में पहुंची थी। यह उनके प्रसिद्ध आइबिस ट्रिलॉजी का पहला उपन्यास है।

घोष के साहित्य में इतिहास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय प्रमुख रहे हैं। उनकी पुस्तक द ग्रेट डिरेंजमेंट में जलवायु परिवर्तन और उसके मानवीय प्रभावों को केंद्र में रखा गया है।
दक्षिण एशियाई साहित्य से जुड़े अन्य चर्चित नामों में सलमान रुश्दी, माइकल ओंडाट्जे और आनंदा देवी का भी उल्लेख संभावित दावेदारों के रूप में किया जाता है।
मुराकामी से एटवुड तक कई बड़े नाम चर्चा में
साहित्य नोबेल की संभावित दौड़ में कई देशों के प्रतिष्ठित लेखक शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें जापान के हारुकी मुराकामी, ऑस्ट्रेलिया के जेराल्ड मर्नेन, अमेरिका के थॉमस पिंचन, मेक्सिको की क्रिस्टीना रिवेरा गार्सा, स्पेन के एनरिक विला-मातास, पुर्तगाल की लिडिया जॉर्ज, रूस की ल्यूडमिला उलित्स्काया, कनाडा की मार्गरेट एटवुड और फ्रांस के मिशेल ह्वेलेबेक जैसे नाम शामिल हैं।
हालांकि, ये नाम आधिकारिक दावेदारों की सूची नहीं हैं। नोबेल पुरस्कार के नामांकन से जुड़ी जानकारी गोपनीय रखी जाती है।

अब तक सिर्फ टैगोर को मिला साहित्य नोबेल
भारत की ओर से अब तक रवींद्रनाथ टैगोर ही साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय हैं। उन्हें 1913 में गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल दिया गया था। टैगोर एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता भी थे।
नोबेल रिकॉर्ड के अनुसार, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, श्री अरविंद, ताराशंकर बंद्योपाध्याय और आर.के. नारायण समेत कई भारतीय लेखकों के नाम अलग-अलग वर्षों में साहित्य नोबेल के लिए नामांकन में शामिल रहे हैं।
50 साल तक गोपनीय रहते हैं नामांकन
नोबेल पुरस्कार की प्रक्रिया में नामांकित लेखकों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाते। नामांकन से संबंधित जानकारी 50 वर्षों तक गोपनीय रहती है। इसलिए 2026 में किन लेखकों को आधिकारिक तौर पर नामांकित किया गया है, इसकी पूरी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं होगी।
विजेता को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में आयोजित समारोह में मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इस वर्ष नोबेल पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर बताई गई है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 11.5 करोड़ रुपये के बराबर है।
अब साहित्य जगत की नजरें शाम 4:30 बजे होने वाली घोषणा पर टिकी हैं। देखना होगा कि इस बार नोबेल समिति का प्रतिष्ठित साहित्य सम्मान किस लेखक के नाम जाता है।
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