राशन खत्म होने के डर से सुबह छह बजे से पहले ही लग रही कतार,कम अनाज देने का आरोप

लखनऊ। सरकारी राशन की दुकान पर अनाज लेने के लिए जरूरतमंदों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। दुकान खुलने का निर्धारित समय सुबह नौ बजे है, लेकिन राशन खत्म होने की आशंका में लोग सुबह छह बजे से पहले ही पहुंचकर कतार में लग जा रहे हैं। इस इंतजार में बुजुर्गों और महिलाओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, राशन वितरण में निर्धारित मात्रा से कम अनाज देने के आरोप ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राशन लेने पहुंचे लाभार्थियों का कहना है कि दुकान पर समय से पहले पहुंचने के बावजूद उन्हें राशन मिलने की चिंता बनी रहती है। लोगों को आशंका रहती है कि देर से पहुंचने पर राशन खत्म हो सकता है। इसी डर से वे सुबह-सुबह दुकान के बाहर कतार में लगने को मजबूर हैं। जरूरतमंदों को अपने हिस्से का अनाज पाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
मोबाइल पर 15 किलो का संदेश, मिलने का दावा 12 किलो
लाभार्थियों ने राशन वितरण में कथित कटौती का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मोबाइल पर आने वाले संदेश में जितने अनाज का विवरण दिया जाता है, मौके पर उससे कम राशन मिलता है। लोगों के मुताबिक, तीन यूनिट पर 15 किलो राशन मिलने का संदेश आने के बावजूद उन्हें केवल 12 किलो अनाज दिया जाता है। यदि यह अंतर सही पाया जाता है, तो यह राशन वितरण की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर सवाल है।
बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ रही परेशानी
सुबह छह बजे से पहले कतार में लगना उन लोगों के लिए ज्यादा मुश्किल है, जिनके लिए लंबे समय तक खड़े रहना आसान नहीं है। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और जरूरतमंद परिवारों के सदस्य शामिल हैं। राशन वितरण की प्रक्रिया में देरी और अनाज खत्म होने की आशंका के चलते लोगों को अपना समय खर्च करना पड़ रहा है। लाभार्थियों की मांग है कि उन्हें निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जाए और वितरण व्यवस्था ऐसी हो, जिससे घंटों इंतजार की नौबत न आए।
दुकानदार ने दी सफाई, रिकॉर्ड की जांच जरूरी
मामले में राशन दुकानदार ने भी अपना पक्ष रखते हुए सफाई दी है। हालांकि, लाभार्थियों के आरोपों और दुकानदार के पक्ष के बीच वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए वितरण से जुड़े अभिलेखों की जांच जरूरी है। मोबाइल पर भेजे गए राशन के संदेश, ई-पॉस मशीन में दर्ज वितरण का विवरण और लाभार्थियों को वास्तव में दी गई अनाज की मात्रा का मिलान होने पर ही कथित कमी की स्थिति साफ हो सकेगी।
फिलहाल, लाभार्थियों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है। सवाल यह है कि जब राशन वितरण की मात्रा का विवरण मोबाइल पर भेजा जा रहा है, तो लाभार्थियों को उनके हिस्से का पूरा अनाज मिलने की पुष्टि कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
लेखक के बारे में
Syed Fiza Khatoon
सैयद फ़िज़ा खातून ‘विजुअल लाइव’ की तकनीकी एवं डिजिटल टीम की महत्वपूर्ण सदस्य हैं। वर्ष 2014 में स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद से उन्होंने मीडिया के तकनीकी और डिजिटल कार्यों में अपनी दक्षता विकसित की है। न्यूज के लेआउट और प्रस्तुतीकरण, कंटेंट के डिजिटल प्रसारण तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खबरों के अपडेट में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। खबर को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने से लेकर उसके डिजिटल वितरण तक वह जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करती हैं। सौम्य और मिलनसार स्वभाव के साथ नई तकनीकों और बदलते डिजिटल मीडिया को सीखने की निरंतर ललक उनकी कार्यशैली की खास पहचान है। टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और हर कार्य में कुछ नया सीखना उनकी पेशेवर सोच को दर्शाता है। डिजिटल पत्रकारिता के तेजी से बदलते दौर में तकनीकी समझ और रचनात्मक सोच के साथ सटीक, आकर्षक और प्रभावी न्यूज प्रस्तुतीकरण* में उनका योगदान ‘विजुअल लाइव’ की डिजिटल टीम को मजबूती प्रदान करता है। Syed Fiza Khatoon की सभी खबरें देखें →
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