अवैध हूटर-प्रेशर हॉर्न पर हाईकोर्ट की सख्ती, 15 जनवरी तक सरकार को देना होगा जवाब

लखनऊ। राजधानी में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और वाहनों में अवैध हूटर व प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर औद्योगिक, व्यावसायिक, आवासीय और साइलेंस जोन चिह्नित कर उनकी अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न और अनधिकृत हूटर के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने को कहा है।
निजी वाहनों में हूटर के इस्तेमाल पर सख्ती
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और अमिताभ कुमार राय की पीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों का वर्गीकरण जरूरी है।
कोर्ट ने वाहनों में प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न की बिक्री, उन्हें लगाने और उनके इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा। निजी वाहनों में अनधिकृत हूटर के उपयोग पर भी सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी और आपातकालीन वाहनों को ही नियमानुसार अनुमति
अदालत के निर्देशों के अनुसार, हूटर का इस्तेमाल केवल अधिकृत सरकारी और एम्बुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों में नियमानुसार किया जाना चाहिए। निजी गाड़ियों में अनधिकृत हूटर लगाकर चलने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है।
ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए क्षेत्रों का वर्गीकरण जरूरी
कोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन कराने के लिए औद्योगिक, व्यावसायिक, आवासीय और साइलेंस जोन की पहचान और अधिसूचना जरूरी है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में ध्वनि सीमा लागू करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
15 जनवरी 2027 तक देनी होगी कार्रवाई रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशों के अनुपालन के लिए आवश्यक कदम उठाने और 15 जनवरी 2027 तक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अब सरकार की ओर से इन निर्देशों पर की जाने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
अदालत के इस रुख से सड़क पर अनावश्यक तेज आवाज करने वाले हॉर्न और निजी वाहनों में हूटर के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने की उम्मीद है। हालांकि, निर्देशों का वास्तविक असर उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
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